फर्रुखाबाद। शहर के प्रसिद्ध पांचाल घाट स्थित दुर्वासा ऋषि आश्रम के महंत ईश्वरदास महाराज ने कई महीनों से राजनेताओं से मेलजोल के चलते चुनाव लड़ने की अटकलों पर खुद विराम लगा दिया। कहा कि महंत का पद किसी भी चुनावी पद से बड़ा है। एक सवाल पर कहा कि राममंदिर के दान में चोरी महापाप है। मठ मंदिर व आश्रम संतों के अधीन होने चाहिए। सरकार का दखल ठीक नहीं है।
महंत ईश्वरदास महाराज रविवार को अपने आश्रम में पत्रकारों से रूबरू थे। कहा कि कई महीनों से सोशल मीडिया पर चुनाव लड़ने को लेकर तरह-तरह की पोस्ट डाली जा रही हैं। यह ठीक नहीं है। हम जिस स्थान के महंत हैं, वह सिद्ध स्थान है। यहां किसी भी पार्टी का नेता आए, सभी सम्मान देते हैं। इतनी बड़ी संस्था चला रहे हैं तो राजनीतिक लोगों से संबंध रखना कोई बुरी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर के दान से चोरी की है, उन्हें सात जन्मों तक भोगना पड़ेगा। राम मंदिर में भक्तों की निश्चल श्रद्धा है। वह डगमगाने वाली नहीं है। गड़बड़ियां तो अन्य संप्रदायों के धर्मस्थलों में भी होती हैं, मगर मामले बाहर नहीं आते।
उन्होंने कहा कि जिन भी मठ, मंदिरों में संतों का आधिपत्य है, वहां श्रद्धालुओं को निरंतर भोजन आदि मिलता है, मगर सरकार के अधीन वाले अधिकांश धर्मस्थलों पर निशुल्क भोग की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि राममंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन जरूरी है। ट्रस्ट के ऊपर भी दो संस्थाएं हों, ताकि समय-समय पर शिकंजा कसता रहे।