डाक्टरों की लापरवाही के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमसाबाद में प्रसव के 20 मिनट बाद नवजात ने दम तोड़ दिया।
प्रसूता की मां कभी डाक्टर तो कभी नर्स से नवजात शिशु को देख लेेने की मिन्नतें करती रही लेकिन संवेदनहीन हुए अस्पताल के चिकित्सक और कर्मचारियों ने महिला की एक नहीं सुनी। आठ दिन के भीतर नवजात के चिकित्सा के अभाव में दम तोड़ने की यह दूसरी घटना है।
पड़ोसी जिला कन्नौज के थाना छिबरामऊ की रहने वाली सविता (28) पत्नी सूरजपाल अपने मायके हसनापुर में रह रही थी। शुक्रवार की रात जब प्रसव पीड़ा हुई तो उसकी मां मुन्नी देवी उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शमसाबाद लेकर आईं।
मुन्नी देवी का कहना है कि पहले तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दरवाजा घंटे भर तक नहीं खोला गया। वह अस्पताल का दरवाजा पीटती रही। बाद में नर्स निकलकर आई और उसकी बेटी को भर्ती कर लिया। करीब 4 बजे सविता ने बच्चे को जन्म दिया।
जन्म देने के बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी तो वह डाक्टर धन सिंह शाक्य के आवास पर भागकर गई लेकिन डाक्टर ने अपना दरवाजा नहीं खोला। उसने ड्यूटी पर तैनात नर्सों से भी नवजात शिशु की हालत गंभीर होने की बात कही। किसी ने भी प्रसूतगृह में आने की जहमत नहीं उठाई।
नतीजतन 4:20 बजे नवजात शिशु की मौत हो गई। डा. धन सिंह शाक्य ने इस घटना के बाद फोन उठाना बंद कर दिया। इससे पहले 18 सितंबर को दीपा सिंह पत्नी अभय सिंह निवासी आलेपुर ने भी इसी अस्पताल में बच्चा जना था और उस बच्चे की प्रसव के बाद मौत हो गई थी।
मौत का कारण आक्सीजन कम होना बताया गया था। आए दिन इस अस्पताल में ऐसी घटनाएं घट रही हैं। इस संबंध में जब मुख्य चिकित्साधिकारी डा. राकेश कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि फिलहाल उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।
एक सियासत के तहत शमसाबाद में इस तरह की घटनाओं को हवा दी जा रही है।