फोटो- 41 यज्ञ शाला का बनाते साधु। संवाद
फर्रुखाबाद। पांचाल घाट पर लगने वाला मेला रामनगरिया इस बार हाईटेक हो गया है। इसके लिए रामगनरिया की वेबसाइट बनाई। साथ ही मेला रामनगरिया का बनाया गया लोगो फर्रुखाबाद की पौराणिक गाथा सुना रहा है। इसमें तीन युगों से संबंधित साक्ष्यों को समाहित किया गया है।
गंगा की रेत पर बसी रामनगरिया में मिनी कुंभ का नजारा देखने को मिलता है। यहां कई जनपदों से श्रद्धालु कल्पवास करते हैं। हर वर्ष कल्पवास क्षेत्र श्रद्धालुओं की संख्या के साथ बढ़ता जा रहा है। इससे आस्था के केंद्र बने इस मेले को पर्यटन के नक्शे पर ले लिया गया है। पर्यटन विभाग से यहां हरिद्वार में हरि की पौढ़ी की तर्ज पर करीब आठ करोड़ से स्नान घाट बनाया गया।
इस बार मेला रामनगरिया की वेबसाइट तैयार करने के साथ लोगो भी बनाया गया है। वेबसाइट खोलकर रामनगरिया के साथ पूरे जिले का इतिहास देखने को मिल रहा है। वहीं रामनगरिया का लोगो पौराणिक धरोहरों को समेटे हुए है। इसमें तीन युगों के साक्ष्य समाहित हैं। लोगो में कलयुग के बाबा नीबकरोरी के दर्शन होते हैं वहीं द्वापर में राजा द्रुपद की राजधानी रहे कांपिल्य (कंपिल) को दर्शाने के लिए अर्जुन के मीन भेदन के दौरान की मुद्रा को दर्शाया गया है। इसी युग में शहर में पांडवों द्वारा स्थापित किए गए पांडवेश्वर नाथ मंदिर के शिवलिंग के दर्शन हो रहे हैं।
बौद्ध तीर्थ स्थल संकिसा का इतिहास भी लोगो में समाहित किया गया है। अयोध्या के मंदिर में विराजमान रामलला को बीच में स्थापित कर त्रेता युग से भी जोड़ा गया है। लोगो में यह सभी दृश्य पांचाल घाट पर बह रही मां गंगा की अविरल धारा में कल्पवास क्षेत्र के साथ नजर आ रहे हैं। इस लोगो व रामनगरिया को पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर भी जगह दी गई है। पहली बार मेले के लिए पर्यटन विभाग ने 30 लाख रुपये मंजूर किए हैं। इससे पहले एनडी तिवारी के शासन काल में सरकार ने मेले को पांच हजार रुपये दिए थे।