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दोबार जांच शुरू होने से आरएम व सेवानिवृत्त प्रधान प्रबंधक मुश्किलें बढ़ीं

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विवेचक ने की थी गड़बड़ी, दोबारा जांच शुरू
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फर्रुखाबाद। 300 फर्जी पीआरडी जवानों की रोडवेज में नियुक्ति के मामले में फतेहगढ़ कोतवाली में दर्ज मुकदमे में जांच अधिकारी को बदल दिया। नए विवेचक ने शुक्रवार को शिकायतकर्ता अलीगढ़ एआरएम के बयान दर्ज किए। पुराने विवेचक के खिलाफ जांच में गड़बड़ी की शिकायत पर आईजी ने सीओ सोहराब आलम से जांच कराई थी। जिसमें कई कमियां मिलीं, सीओ ने विवेचक के खिलाफ कार्रवाई की भी संस्तुत की है।
साल 2011-12 में प्रदेश के गाजियाबाद, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, फर्रुखाबाद, अलीगढ़ आदि जिलों में पीआरडी जवानों को परिचालक के पद पर भर्ती किया गया था। जांच के दौरान इनमें 300 के नाम, पते फर्जी मिले थे। जिसकी शिकायत वर्तमान में अलीगढ़ में तैनात एआरएम(वित्त) प्रवीन कुमार ने कीं तो मामला शासन तक पहुंचा। प्रवीन ने विभागीय लीपापोती के बाद अदालत में वाद दायर किया।
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इसके बाद 2020 में फतेहगढ़ कोतवाली में सहारपुर के आरएम नीरज सक्सेना, सेवानिवृत्त प्रधान प्रबंधक संविदा जेएन सिन्हा और तत्कालीन पीआरडी अधिकारी पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इसकी जांच दरोगा दिनेश चंद्र यादव कर रहे थे। जांच अधिकारी ने आरएम सहारनपुर और सेवानिवृत्त प्रधान प्रबंधक को दोषमुक्त करार दिया।
इस पर मार्च 2021 में शिकायतकर्ता प्रवीन ने विवेचक के खिलाफ जांच में गड़बड़ी की शिकायत आईजी से की। आईजी ने प्रवीन की शिकायत की जांच सीओ मोहम्मदाबाद सोहराब आलम को दी। उन्होंने दो अप्रैल को जांच पूरी कर दिनेश चंद्र यादव की जांच में कई खामियां पाईं। रिपोर्ट में कहा गया है कि विवेचक ने कई तथ्यों पर साक्ष्य नहीं जुटाए।
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विवेचना दोषपूर्ण है, इसलिए वह दोषी है। विवेचक पर दंडात्मक कार्रवाई की भी संस्तुति की। सीओ की जांच के बाज एसपी अशोक कुमार मीणा ने दरोगा नरेश कुमार को जांच सौंप दी है। नरेश कुमार के समक्ष शिकायतकर्ता एआरएम प्रवीन कुमार ने बयान दर्ज कराए। दोबारा जांच शुरू होने से आरएम और सेवानिवृत्त प्रधान प्रबंधक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
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