पुलिस महानिदेशक अभियोजन डा. सूर्य कुमार ने शुक्रवार को कलक्ट्रेट सभागार में सरकारी वकीलों के साथ मुकदमों के निस्तारण की समीक्षा की। इसमें कुछ सरकारी वकीलों के निस्तारित मुकदमों में सजा पाने वाले मुकदमों की संख्या कम और दोषमुक्त होने वाले अभियुक्तों के मुकदमों की संख्या अधिक रही।
कुमार ने इस पर नाराजगी जताई। समीक्षा के बाद पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि जुलाई 2015 से अभी तक मुकदमों के अभियुक्तों को सजा होने का ग्राफ बढ़ा है।
पुलिस महानिदेशक अभियोजन ने पत्रकार वार्ता में कहा कि अभियुक्तों को अधिक से अधिक सजा कराने के लिए अभियान जुलाई 2015 में शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत 48965 अभियुक्त को चिन्हित कर सजा दिलाने का अभियान चला, जिसमें प्रदेश को सफलता मिली। इसमें 8389 अभियुक्तों को 10 या इससे अधिक की सजा हुई है।
40 अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई गई है।
3251 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा हुई है। 3461 हिस्ट्रीशीटरों को सजा दिलाने का काम किया गया है। 346029 मुकदमाती माल का निस्तारण कराया गया। पूरे प्रदेश में 187802 अभियुक्तों की अदालतों में जमानतें खारिज कराई गईं। 236787 अभियुक्तों को पुलिस ने प्रदेश भर से गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
फर्रुखाबाद जिले में लगभग 300 गाड़ी और 19000 अन्य मुकदमाती सामग्री निस्तारण के लिए लंबित पड़ी हैं। पुलिस महानिदेशक ने बताया कि फर्रुखाबाद में सहायक अभियोजन अधिकारियों की कमी है। अगर कोई सेवानिवृत्त अभियोजन अधिकारी काम करना चाहता है तो उसको मानदेय पर संविदा पर तैनाती की जा सकती है।
इसके लिए अभियोजन कार्यालय में आवेदन लिए जाएंगे। अगर किसी मुकदमे के गवाहों को आरोपी या उसके रिश्तेदार धमकाते हैं तो ऐसे गवाह पीला कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। सहायक अभियोजन अधिकारी छोटेलाल भारती को साइबर क्राइम के शिकंजा कसने को प्रशिक्षण दिया गया है।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र बघेल, एडीएम आरबी सोनकर, जिला शासकीय अधिवक्ता प्रभाशंकर औदिच्य, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी एसके वर्मा, प्रदीप कुमार, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शैलेन्द्र सिंह चौहान, सुरेंद्र कुमार राणा, तबस्सुम गजाला, प्रवीण सिंह और शिशुपाल सिंह यादव मौजूद रहे।