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कहर ढाने लगी गंगा व रामगंगा की बाढ़

Tue, 14 Jul 2015 11:11 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
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गंगा और रामगंगा ने जिले में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से ब्लाक शमसाबाद और राजेपुर क्षेत्र में कटान शुरू हो गया है। सोमवार को जहां शमसाबाद क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक में पांच झोपड़ियां बह गई थीं। वहीं मंगलवार को भी इस गांव में तीन झोपड़ियां पानी में समा गईं। ब्लाक राजेपुर क्षेत्र में भी कई गांव बाढ़ के मुहाने
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पर खड़े हैं। बाढ़ को देखते हुए ग्रामीणों ने पक्के और कच्चे मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया है। बाढ़ से ग्रामीण भयभीत हैं। पेश है रामगंगा व गंगा के कहर पर पड़ताल करती रिपोर्ट।

गांव कटरी तौफीक में गंगा का कहर शांत नहीं हुआ है। मंगलवार को भी बाढ़ में तीन झोपड़ियां बह गईं। बाढ़ को देखते हुए ग्रामीणों ने कच्चे व पक्के मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया है। ग्रामीण गृहस्थी का सामान ट्रैक्टर-ट्राली पर भरकर पलायन करने लगे हैं। कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेती भी कटने लगी है।
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कटरी तौफीक में सोमवार को बाढ़ में पांच झोपड़ियां बह गई थीं।  ग्रामीण सोमवार देर रात तक झोपड़ियों और कच्चे-पक्के मकानों को तोड़कर गृहस्थी का सामान निकालते रहे। गांव के संजीव कुमार, ज्ञानचंद्र और जयचंद्र ने बताया कि उन्होंने गृहस्थी का सामान निकाल लिया था। परिवार वालों को ऊंचे स्थान पर छोड़कर रात में झोपड़ियों के पास आ गए थे। सोचा

सुबह झोपड़ियां उठा ले जाएंगे। मंगलवार तड़के शौच को चले गए। जब लौटे तो झोपड़ी बह चुकी थीं। बाढ़ को देखते हुए गांव के रामप्रकाश और श्रीकृष्ण पक्के मकान तोड़कर ईंटों और गृहस्थी के सामान को ट्रैक्टर-ट्राली में भरवाकर पलायन करने की तैयारी में थे। उन्होंने बताया कि रात भर मकानों को तोड़ा है। मुन्नालाल ने बताया कि वह झोपड़ी और गृहस्थी

का सामान ट्रैक्टर-ट्राली पर लादकर ऊंचे स्थान पर जा रहे हैं। जगरूप ने बताया कि उनका 10 बीघा खेत कट गया। गंगाधर ऊंचे पर स्थित प्राथमिक विद्यालय कटरी तौफीक में झोपड़ी रख बस गए हैं। अमर सिंह, मदनपाल, नंद किशोर, दाताराम, अमर कुमार कच्चे मकानों में बाढ़ का पानी भर गया है। इनके घरों की महिलाएं पानी के बीच ही भोजन आदि

बनाने को मजबूर हैं। इन ग्रामीणों का कहना है कि अभी सैलाब का पानी घरों में घुसा है। उनके घर तक कटान शुरू नहीं हुआ है। अगर पानी कम न हुआ तो पलायन कर जाएंगे। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में चारों ओर बाढ़ का पानी भरा है। वहीं समैचीपुर चितार, कमथरी और ऊगरपुर में भी चारों ओर खेतों के किनारे पानी पहुंच गया है।

रामगंगा ने खरगपुर में कटान किया शुरू
राजेपुर ब्लाक क्षेत्र के गांव खरगपुर में रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से खेतों का कटान शुरू हो गया है। अन्य गांवों में भी रामगंगा का पानी खेतों में घुस आया है। रामगंगा की धार मोड़े जाने के लिए खोदा गया नाला बेकार साबित हो रहा है। रामगंगा की मुख्य धार खरगपुर गांव की ओर बह रही है। पंचायत घर के पास भी तेज गति से रामगंगा बह रही हैं।

गांव खरगपुर में रक्षपाल सिंह, सुधा देवी, यदुवीर सिंह और प्रेम सिंह के खेत के किनारे रामगंगा कटान करने लगी हैं। पंचायत घर के पास रामगंगा की तेज धार बह रही है। रामवीर, शैलेंद्र सिंह, रक्षपाल सिंह और धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि धारा बदलने के लिए खरगपुर के पास दक्षिण ओर दो साल पहले नाला खोदा गया था। पर इसमें न के बराबर पानी जा रहा

है। रामगंगा की मुख्य धार गांव की ओर है। इससे रामगंगा ने खेतों का कटान करना शुरू कर दिया है। अगर जलस्तर कम न हुआ तो मकान भी कटने लगेंगे। पंचायत घर भी कट सकता है। ग्रामीणों का आरोप था कि इस बार बाढ़ से बचाव के लिए सिंचाई विभाग ने कोई कार्य नहीं कराया। दो साल पहले सिंचाई विभाग द्वारा रामगंगा में बनाए गए परकोपाइन में से

100 रामगंगा किनारे स्थित प्रेम सिंह और रक्षपाल के खेत के पास ही खड़े कर दिए गए। इन्हें रामगंगा में नहीं लगाया गया। इनमें से 24-25 परकोपाइन प्रेम सिंह ने अपने खेत के चारों ओर लगा रखे हैं। ग्रामीणों का कहना था कि अगर यह परकोपाइन रामगंगा में लगवाए जाते तो कुछ राहत मिलती। वहीं बिचपुरिया, कड़क्का, राजेपुर और ईमादपुर में रामगंगा का पानी खेतों में घुस आया है।
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