राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की ओर से वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए
कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मैन्यूफैक्चरिंग से सूक्ष्म,
लघु और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को प्रेरित किया
गया। शहर के राजपूताना होटल में मंगलवार को वस्त्र उद्योगों को बढ़ावा देने
के लिए उद्यमियों को प्रेरित किया गया। राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद कानपुर
के निदेशक रामेश्वर दुबे ने जिले के उद्यमियों को लीन मैन्यूफैक्चरिंग के
बारे में जानकारी दी। उन्होेंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन मेक इन
इंडिया के तहत चल रही इस योजना को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि इस
योजना में 350 समूहों के सापेक्ष 125 समूहों का गठन किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में अभी तक केवल पांच समूह बनाए गए हैं। इस
योजना
का उद्देश्य छोटे, मझोले उद्योगों को एकत्र कर सामूहिक रूप से लाभ
पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि उद्योगों के एकीकरण से वैश्विक बाजार की
प्रतियोगिता में कम लागत पर विश्व स्तरीय उत्पादन देना है। उन्होंने कहा कि
इसके लिए केंद्र सरकार 5 से 10 समूूहों को 35 लाख रुपये तक का वित्तीय लाभ
व्यावसायिक सलाहकार के माध्यम से देती है। इसमें 20 प्रतिशत लागत
उद्यमी
को लगानी है। शेष 80 प्रतिशत केंद्र सरकार देगी। उन्होंने जिले में समूह
गठन करने पर जोर दिया। आईआईए के चेयरमैन रोहित गोयल ने उद्यमियों से विश्व
स्तरीय उत्पादन और निर्यात में भागीदारी करने की अपील की। सहायक निदेशक
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय के सहायक निदेशक मनोज पांडेय ने
कहा कि विश्व में अपनी पहचान को स्थापित करने
के लिए उद्योगों को संगठित
होकर कार्य करना होगा। कार्यशाला को सहायक निदेशक आनंद वर्मा, उपायुक्त
जिला उद्योग केंद्र जयसिंह, आदि ने संबोधित किया। इस मौके पर विकास
गुप्ता, दिनेश साध, संतोष साध, मुकेश साध, विजय पाल, सुभाष अग्रवाल,
करुणानिधि अग्रवाल, जय साध, निर्भय सक्सेना, प्रमोद जैन, पदम पांडेय,
अरविंद अग्रवाल, निशांत साध, राजू साध मौजूद रहे।