फर्रुखाबाद। सूबे की सरकार ने पॉलीथिन बनाने व बिक्री पर रोक लगा दी है। इससे पहले हाईकोर्ट व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पॉलीथिन की बिक्री पर रोक लगा चुकी हैं। इनका कोई असर नहीं हुआ। जिले में रोज तकरीबन पांच टन पॉलीथिन की खपत होती है।
शहर से लेकर देहात तक पॉलीथिन चलन में है। खाने से लेकर पैकिंग तक में पॉलीथिन का उपयोग हो रहा है। इसकी बिक्री रोकने के लिए प्रशासन भी संजीदा नहीं है। रोज दो टन के करीब शहर और तीन टन के करीब कस्बों व देहात में पॉलीथिन की खपत होती है। उपयोग के बाद पॉलीथिन नष्ट नहीं होती है।
खेतों में यह उपज को प्रभावित करती है। सूर्य के साथ रिएक्शन कर यह क्लोरोफ्लोरो कार्बन रिलीज करती है। पॉलीथिन में रखे खाद्य पदार्थ खाने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इन्हीं समस्याओं को लेकर सूबे की सरकार ने पॉलीथिन बनाने, भंडारण करने व ब्रिकी पर प्रतिबंध लगाया है। शनिवार को बिक्री पर कोई असर नजर नहीं आया। रोज की तरह ही पॉलीथिन में सामान की खरीद फरोख्त होती रही।