पिछड़ी जाति के रैपिड सर्वे और पंचायत बीएलओ की ड्यूटी न करने के मामले में
142 शिक्षकों के निलंबन का मामला तूल पकड़ने लगा है। शिक्षक संगठनों ने
शिक्षकों को तत्काल बहाल किए जाने की आवाज उठाई है। बहाली न होने पर आंदोलन
की चेतावनी दी है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी योगराज सिंह ने रैपिड
सर्वे तथा बीएलओ पंचायत ड्यूटी न करने वाले कमालगंज के दस और बढ़पुर ब्लाक
के 132 शिक्षकों को निलंबित कर दिया है। शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई होने
पर शिक्षक संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया। शुक्रवार को उत्तर प्रदेशीय
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ और उत्तर प्रदेश
प्राथमिक शिक्षक
संघ के नेताओं ने बीएसए को ज्ञापन दिया। इसमें कहा गया कि
उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रमुख सचिव ने शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य
कराने पर रोक लगाई है। इसके बावजूद शिक्षकों से जबरन गैर शैक्षणिक काम
कराया जा रहा है। जिन शिक्षकों ने रैपिड सर्वे और बीएलओ ड्यूटी करने से
इनकार किया, उनको निलंबित कर दिया गया। शिक्षकों पर की गई कार्रवाई गलत
है।
दैवी आपदा के नाम पर शिक्षकों के वेतन से दो बार कटौती की गई। फिर भी
सहयोग करने की बजाय शिक्षकों पर कार्रवाई किया जाना गलत है। निलंबन की
कार्रवाई तत्काल समाप्त की जाए। ऐसा नहीं होने पर शिक्षक संगठन आंदोलन
करेंगे।
इस दौरान उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (दूसरे गुट)
अध्यक्ष भूपेश पाठक, उपाध्यक्ष आर्येंद्र सिंह यादव, जिला मंत्री नरेंद्र
पाल सिंह राजपूत, प्रभात कुमार दुबे, प्रवेश सिंह राठौर, पूर्व माध्यमिक
शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद गुप्ता, महामंत्री राजीव कुमार
गंगवार, ओमकार सिंह, मनोज कुमार, पियूष कटियार, मुनीश चंद्र दीक्षित, विनोद
उपाध्याय, विक्रम सिंह, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष संजय
तिवारी, नरेश चंद्र द्विवेदी, मजहर मुहम्मद खां, सुखदेव दीक्षित मौजूद रहे।