आखिरकार बाढ़ आ गई। विकास खंड क्षेत्र के गांव कटरी तौफीक में बाढ़ का पानी
घुस आया। कई कच्चे मकानों में पानी भर गया है। ग्रामीणों ने गृहस्थी का
सामान निकालकर ऊंचे स्थान पर बने मकानों में पहुंचा दिया है। चारों ओर बाढ़
के चलते ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण सड़क
किनारे भोजन बना रहे हैं। गांव में पानी घुसने की
सूचना मिलने पर लेखपाल
गांव पहुंचे। उन्होंने पड़ोसी गांव रंपुरा में ग्रामीणों के रहने की
व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। सोमवार रात गंगा का जलस्तर यकायक बढ़
गया। इससे बाढ़ का पानी गांव में घुस आया। मंगलवार सुबह भी जलस्तर थमने के
बजाय और बढ़ गया। इससे गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गया है। बाढ़ का पानी
मदनपाल, दाताराम, अमर सिंह, नंदकिशोर, मोहित कुमार, गंगा सिंह, धर्मपाल,
मनोज और रिंकू के कच्चे मकानों में घुस चुका है। ग्रामीणों ने आनन-फानन
में
गृहस्थी का सामान निकालकर ऊंचे स्थान पर बने कच्चे मकानों में जाकर
रखवाया। मनोज कुमार, दाताराम और अमर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़
का पानी घरों में घुसने से सड़क किनारे भोजन बनाने को मजबूर हैं। धर्मपाल,
मोहित कुमार और गंगा सिंह का कहना है कि हैंडपंप भी बाढ़ के पानी में डूबे
हैं। पीने का पानी आधा किलोमीटर दूर से
लाना पड़ रहा है। गृहस्थी का सामान
निकालकर ऊंचे स्थान पर बने कच्चे मकानों में रख लिया है। गांव में चारों
ओर पानी भरा है। इसके चलते शौच आदि में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा
है।
बाढ़ की सूचना मिलने पर तहसीलदार विनोद जोशी ने मौके पर लेखपाल
रामलखन पांडेय को भेजा। लेखपाल ने बताया कि
बुधवार को ग्रामीणों को रंपुरा
गांव में भिजवाया जाएगा। रंपुरा के प्रधान से कहकर इन ग्रामीणों के रहने के
लिए पन्नी आदि की व्यवस्था करवाई जा रही है।
परिषदीय स्कूलों में भरा पानी
गांव
कटरी तौफीक में एक ही परिसर में प्राथमिक व जूनियर विद्यालय बने हैं। बाढ़
का पानी करीब एक मीटर ऊंचाई तक स्कूलों में भरा है। जूनियर विद्यालय के
प्रधानाध्यापक रियासत अली ने कहा कि स्कूल में पानी भरे होने के चलते कक्षा
1 से 3 तक के बच्चों की छुट्टी कर दी गई। बुधवार से सिर्फ कक्षा 4 से
कक्षा 8 तक के बच्चों को बुलाया जाएगा। प्राथमिक
विद्यालय के प्रधानाध्यापक
इफ्तार अहमद ने बताया कि स्कूल में पानी भरा होने के चलते वह फिसल कर
चुटहिल हो गए। उन्होंने कहा कि स्कूल में पानी भरा होने के चलते बुधवार से
बच्चों को पढ़ने के लिए नहीं बुलाएंगे। कोई हादसा हो जाता है तो उसकी
जिम्मेदारी किसकी होगी।
ऊगरपुर की पुलिया कटी
बाढ़ के पानी
से गांव ऊगरपुर के पास बनी पुलिया कट गई है। इसके चलते झौआ से रूपपुर
मंगली मार्ग का आवागमन ठप हो गया। दोनों गांव के ग्रामीणों को फर्रुखाबाद
से होकर एक-दूसरे के गांवों तक आवागमन करना पड़ रहा है।
करनपुर घाट व कुडनी सारंगपुर में घुसा पानी
जलस्तर बढ़ने से कई गांवों के मुहाने पहुंची गंगा
गंगा का जलस्तर बढ़ने से तहसील क्षेत्र के गांव करनपुर घाट और कुडनी
सारंगपुर में पानी घुस गया है। वहीं कई गांवों के मुहाने पर गंगा बह रही
हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में दहशत है। सोमवार रात और मंगलवार तड़के
गंगा का जलस्तर बढ़ने से गांव करनपुरघाट और कुडनाी सारंगपुर में पानी घुस
गया। हालांकि पानी अभी घरों में नहीं घुसा है। दोनों गांवों के चारों
ओर
पानी भरा है। मुनीश कुमार, बहोरन, रामनिवास, रतिराम, जयराम, गंगाराम,
गुड्डू, पूसेलाल, रामनरेश और राधेश्याम का कहना है कि पानी घुसने से आवागमन
में दिक्कत हो रही है। पानी अगर और बढ़ा तो घरों में भी घुसेगा। कहा कि
बीते साल कमर तक पानी हो गया था। इससे आवागमन ठप हो गया था। उन्होंने जिला
प्रशासन से बाढ़ की समस्या से निजात
दिलाए जाने की मांग की है। इसके साथ ही
गंगा किनारे बसे गांव फुलहा, जटपुरा, कैलियाई, मंझा, फकरपुर, कंचनपुर,
लायकपुर, भावपुर चौरासी और कुसमापुर के मुहाने पर गंगा बह रही हैं। गांव के
राधेश्याम, प्रदीप कुमार, संतोष कुमार, बड़ेलला, गजेंद्र सिंह और
अवधेशचंद्र आदि का कहना है कि जलस्तर यदि कम न हुआ तो गांव के अंदर पानी
घुस आएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि अब तो रात जागकर काटने की मजबूरी आ गई
है। वहीं बीते दिन रामगंगा के बढ़े जलस्तर से अलादपुर भटौली और कोलासोता
में दूसरे दिन भी खेतों का कटान जारी है।