सातनपुर मंडी में खुला आलू खरीद केंद्र।
- फोटो : amarujala
प्रदेश सरकार की ओर से आलू किसानों को उनकी फसल का वाजिब मूल्य दिलाने के लिए क्रय केंद्र खोलकर 487 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य निर्धारित कर आलू खरीद करने के निर्देश जारी किए गए थे। पिछले माह आलू क्रय केंद्र खुले, लेकिन वहां सन्नाटे का माहौल है।
फर्रुखाबाद में 6000 हजार क्विंटल आलू खरीद करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक 232 क्विंटल ही खरीद हो सकी है। नतीजतन सरकार की आलू खरीद योजना पहले ही साल धड़ाम हो गई है।
जिले में दो केंद्र पीसीएफ व एक केंद्र यूपीएसएस की तरफ (कुल तीन आलू खरीद केंद्र) खोले गए हैं।
यहां आधी-अधूरी तैयारियों के साथ आलू खरीद चालू कर दी गई। जिला आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी नैपाल राम को नोडल अधिकारी बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई है। केंद्रों पर तैनात प्रभारी को आलू का साइज नापने का तरीका तक नहीं बताया गया है। ऐसे में केंद्र पर कभी-कभी पहुंचने वाले किसान खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
इन केंद्रों पर आलू भंडारण न कर पाने वाले किसान आलू बेचने की कोशिश करते हैं लेकिन जो मानक सरकार की तरफ से तय किए गए हैं वे उन्हें बैरंग लौटने को मजबूर कर देते हैं। क्रय केंद्र पर खरीदे जाने वाले आलू का साइज 30 से 55 एमएम तक होना चाहिए। केंद्र प्रभारी इस साइज का आलू ही लाने की बातें किसानों से कह रहे हैं लेकिन इसे नापना कैसे है, इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
आलू बोरे-बोरियों में भरा जाता है। ऐसे में 30 से 55 साइज छांटने का मतलब है एक-एक आलू को अलग किया जाए। किसानों की मानें तो यह काम मुश्किल है। यदि लेबर लगाकर छंटाई कराएंगे तो फायदे से ज्यादा घाटे की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।