अमृतपुर। 25 वर्ष से दो जिलों की मझधार में फंसे करीब 600 ग्रामीणों को एसआईआर अभियान में भी किनारा नहीं मिला। नई युवा पीढ़ी तो दूर की बात 45 वर्ष आयु के ग्रामीणों को भी मतदान का महत्व नहीं मालूम है। कई प्रयास के बावजूद दोनों जनपदों के हाकिमों ने इन पर ध्यान नहीं दिया। एसआईआर अभियान में भी इनकी सुधि नहीं ली गई। इससे भले ही वह भारत मां के सपूत होने का दावा कर रहे हैं लेकिन उनके पास देश की नागरिकता के भी साक्ष्य नहीं हैं। यह हाल जनपद हरदोई व फर्रुखाबाद के बीच गंगा किनारे बसे गांव परसपुर का है। यहां के ग्रामीण लोकतंत्र के पर्व का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं।
ब्लाक राजेपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत सलेमपुर का मजरा परसपुर 1954 में गंगा में आई बाढ़ से कट गया था। उस दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी ने एक टीले पर ग्रामीणों को बसा दिया। यह भूमि जनपद हरदोई की है। इस गांव में करीब 600 से अधिक आबादी है और 350 मतदाता हैं। यह ग्रामीण वर्ष 2001 तक लोकसभा व विधानसभा चुनाव में मतदान करते रहे। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची से इन ग्रामीणों के नाम गायब हो गए।
इसके बाद ग्रामीण मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए तहसील, ब्लॉक, डीएम कार्यालय व निर्वाचन कार्यालय के चक्कर काटते रहे पर दोबारा मतदाता सूची में उनके नाम शामिल नहीं हो सके। गांव के मंटू सिंह कहते हैं कि ग्राम पंचायत चुनाव में वह अपना प्रधान चुन रहे हैं लेकिन विधायक व सांसद चुनने का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। जबकि राशन कार्ड, मूल निवास प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल आदि प्रपत्र फर्रुखाबाद से मिल रहे हैं। दो सीमाओं के पेच में इस गांव के ग्रामीणों को लोकतंत्र के महापर्व से वंचित रहना पड़ता है। एसआईआर अभियान में भी उन लोगों का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सका। (संवाद)
बीएलओ कहते-वोट बनाने का आदेश नहीं
संजीव कुमार कहते हैं कि 30 साल की उम्र हो चुकी है पर अभी तक वोट नहीं बन पाया है। बीएलओ कहता है कि तुम लोगों के वोट बनाने का आदेश नहीं है। इससे लोकतंत्र के पर्व में भागीदार बनने का हौसला वोट न बनने से दबता जा रहा है।
हमारा दर्द समझने वाला कोई नहीं
गांव के अमित कुमार का कहना है कि 29 वर्ष की उम्र होने के बाद भी उनका वोट नहीं बना है। इससे उन्हें विधायक व सांसद चुनने का अधिकार नहीं है। युवाओं का दर्द भी कोई अधिकारी समझने वाला नहीं है।
युवाओं के साथ अन्याय को हो रहा
लविश कहते हैं कि हम युवाओं के साथ अन्याय को हो रहा है। जब हम लोग फर्रुखाबाद के निवासी हैं और अभिलेख भी हैं। इसके बाद भी वोट नहीं बन पाना लोकतंत्र का अधिकार छीनने के समान है।
दो जिलों की सीमा विवाद में फंसे
अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि दो जिले की सीमा के विवाद में हम सब मतदाता किसी जिले में मतदान नहीं कर पा रहे हैं। जब कि हमारे पूर्वज फर्रुखाबाद के निवासी हैं।
वर्जन
परसपुर गांव के लोगों के लोकसभा व विधानसभा चुनाव की मतदाता सूची में नाम न हाेने के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं है। वह एसडीएम से मामले की जानकारी कर समस्या निस्तारित कराने का प्रयास करेंगे। -अरुण कुमार सिंह, एडीएम व उपजिला निर्वाचन अधिकारी
फोटो-11 संजीव कुमार- फोटो : kathua news
फोटो-11 संजीव कुमार- फोटो : kathua news
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