पत्रकार वार्ता में मौजूद पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर व अन्य।
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हड़ताल के मुद्दे पर वकील दो भागों में बंट गए हैं। एक धड़े ने आम सभा की राय लिए बिना हड़ताल समाप्त करने का विरोध शुरू कर दिया है। इस धड़े ने सोमवार को हड़ताल पर रहने की घोषणा करते हुए अध्यक्ष और सचिव पर वकीलों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।
दरोगा से मारपीट के मामले में कृष्ण गोपाल पाठक और अनिल यादव समेत 10-15 वकीलों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज है। इसके विरोध में जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजीव पारिया ने बुधवार को अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा की थी। मगर शुक्रवार को ही हड़ताल समाप्त कर दी गई। इसको लेकर वकीलों के दूसरे धड़े ने विरोध शुरू कर दिया। पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह राठौर, कुवर सिंह यादव, राजीव वाजपेयी व अन्य वकीलों ने शनिवार को अधिवक्ता भवन में पत्रकार वार्ता की।
इसमें कहा कि महासचिव संजीव पारिया ने वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस होने और दरोगा का तबादला करने का अफसरों से वार्ता में आश्वासन मिलने की जानकारी दी और हड़ताल समाप्त कर दी। हड़ताल समाप्त करने से पूर्व आम सभा की बैठक बुला वकीलों की राय लेना जरूरी था। जब अधिकारियों ने आश्वासन दिया था तो शुक्रवार रात आरोपी वकीलों को पकड़ने के लिए पुलिस ने उनके घरों में दबिश क्यों दी।
इसे लेकर शनिवार को बार एसोसिएशन सभागार में उपाध्यक्ष शशिभूषण दीक्षित की अध्यक्षता में बैठक बुलाई गई। इसमें वकीलों ने हड़ताल मुकदमा वापस न होने तक जारी रखने की मांग की। इस पर महासचिव बैठक से उठकर चले गए। पूर्व अध्यक्ष ने महासचिव पर आरोप लगाया कि उन्होंने सक्षम न्यायिक अधिकारी और पुलिस अधीक्षक से वार्ता होने की जानकारी दी थी। मगर किसी से वार्ता नहीं हुई। अपनी मर्जी से हड़ताल समाप्त कर दी।
इस कारण अभी हड़ताल जारी रहे और आम सभा की बैठक बुलाकर ही कोई निर्णय लिया जाए। सोमवार को कई वकील हड़ताल पर रहेंगे और काम करने वाले वकीलों का विरोध करेंगे। हड़ताल के समर्थन के लिए अधिवक्ता संघ को प्रस्ताव दिया गया है। इस दौरान कई वकील मौजूद रहे।