फर्रुखाबाद। शहर के मोहल्ला कांशीराम कॉलोनी में बाढ़ का पानी कम होने के बाद छह हजार की आबादी के लिए नाले का पानी अब मुसीबत बन गया है। कुछ गलियों को छोड़ अधिकांश में नाले का काला पानी भरा है। उसमें से उठती सड़ांध से घरों में रुकना मुश्किल हो रहा है। मच्छरों का लार्वा भी पल रहा है। बारिश होते ही जलजमाव बढ़ रहा है। पंपसेट से पानी निकालने का प्रयास भी बेकार साबित हो रहा है।
कांशीराम कॉलोनी में 1296 आवास बने हैं, इनमें छह हजार से अधिक आबादी रहती है। यहीं पुलिस चौकी भी है। नौ अगस्त को हुई मूसलाधार बारिश के दिन नगर पालिका का नाला खेतों में कट गया। उसका पानी तालाब के रास्ते होकर कॉलोनी में घुसने लगा। 11 अगस्त को बाढ़ का पानी भी कॉलोनी और आसपास खेतों में भर गया। दो-तीन दिनों में 200 से अधिक आवासों में पानी घुस गया। लोग पलायन कर गए। कई लोग अब भी सड़क किनारे जानवरों को बांधकर रातें गुजार रहे हैं।
फिलहाल बाढ़ का पानी कम हुआ, मगर चंद ऊंची गलियों को छोड़ अधिकांश में नाले का काला कीचड़युक्त पानी भरा है। सीवर टैंक और नाले के पानी में मच्छरों का लार्वा पलने लगा है। इससे रोग फैलने की आशंका है। पालिका प्रशासन पानी निकालने के लिए पंपसेट चलवा रहा, मगर बारिश होते ही कच्चे नाले का पानी खेतों के रास्ते कॉलोनी में जलस्तर बढ़ा देता है।
ईओ विनोद कुमार ने बताया कि बाढ़ का पानी कांशीराम कॉलोनी में भरा है। यदि नाला कटा है और भरा है तो पंपिंग सेट चलाकर निकलवा दिया जाएगा। वहां फॉगिंग कराई जा चुकी है।
शहर विधायक का प्रयास भी असफल
शहर के करीब 15 मोहल्लों का पानी पक्कापुल, गुदड़ी, नौलक्खा, कांशीराम कॉलोनी होकर अर्रापहाड़पुर की ओर जाता है। यह नाला नौलक्खा के बाद कच्चा है। नाले में बारिश के पानी का अधिक दबाव होने से कॉलोनी के सामने ही खेतों में कट जाता है। ग्रामीण क्षेत्र होने के चलते नगर पालिका इसे पक्का नहीं करवा पा रहा। नगर विधायक ने डेढ़ साल पहले एक प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। करीब एक किमी नाला पक्का बनवाने की बात कही गई थी। अभी तक उस प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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500 बीघा खेतों की सब्जियां व फसलें बर्बाद
कॉलोनी के चारों तरफ 500 बीघा से अधिक खेतों में सब्जियां उगाई जाती हैं। इन खेतों में कभी नाला और कभी बाढ़ का पानी घुसने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इन दिनों भिंडी, गोभी, लौकी, तोरई, मिर्च, मूली समेत तमाम तरह की सब्जियां पूरी तरह बर्बाद हो गईं। करीब 200 बीघा खेतों में नाले की पॉलिथीन और अन्य गंदगी भरी है। किसानों को इसे हटाने में कई महीने लग जाएंगे।