अध्ययन केंद्र में राष्ट्रीय गोष्ठी में बोलते मुख्य अतिथि प्रो. एसएन चतुर्वेदी।
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गरीबों क ी आंखों से निकलने वाले आंसू जब तक नहीं रुकेंगे तब तक देश का समग्र विकास संभव नहीं है। यह बात महात्मा गांधी अध्ययन केंद्र में महात्मा गांधी व पं. दीनदयाल उपाध्याय के आर्थिक चिंतन की समानताएं विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रोफेसर एसएन चतुर्वेदी पूर्व अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष वाणिज्य विभाग दीन दयाल उपाघ्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने कही।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर यूएन शुक्ल ने की। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी के सर्वोदय और पं दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय कार्यक्त्रस्म से ही वर्ग संघर्ष और आतंकवाद रुकेगा। जब तक सबका विकास नहीं होगा तब तक गरीबी और अमीरी की खाई समाप्त नहीं होगी।
मुख्य वक्ता प्रोफेसर एसबी गुप्ता ने बताया कि महात्मा गांधी संपन्न परिवार से थे जबकि दीनदयाल उपाध्याय गरीब परिवार में पैदा हुए लेकिन दोनों ने दरिद्रनारायण और सीमांत व्यक्ति को आगे बढ़ाने के लिए अपने विचार रखे।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एके श्रीवास्तव ने गांव की तरफ चलें, स्टार्ट अप, स्टैंड अप, मेक इन इंडिया के माध्यम से तथा एजूकेशन फार ऑल की चर्चा कर राष्ट्र को स्वावलंबी बनाने की बात कही।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. वीके गुप्ता ने अतिथियाें का परिचय प्रस्तुत किया। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. श्याम मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस सत्र में सतेंद्र सिंह गंगवार, दीगेंद्र गंगवार, पूर्व प्राचार्य प्रो. वीएन शर्मा, पतंजलि योग समिति के राजा श्रीवास्तव, शिवराज सिंह, वीके गंगवार, किशोरी लाल गंगवार व छात्र उपस्थित रहे।