हेलीकाप्टर दुर्घटना में शहीद हुए लेफ्टीनेंट कर्नल रजनीश के मां-बाप को दिल्ली से सेना के विशेष यान से वेस्ट बंगाल भेजा गया है। वहां से वह घटनास्थल सुगुना पहुंचेंगे।
रजनीश के फूफा दिनेश प्रजापति ने बताया कि बुधवार को देर रात सैन्य अधिकारियों के जानकारी देने पर उन्हें दिल्ली ले जाया गया था और इसके बाद सेना के विशेष विमान से मां-बाप को सुकना भेजा गया।
अभी तक इस दंपति ने किसी तरह की घर पर जानकारी नहीं दी है। वहीं दूसरी तरफ रजनीश के घर विकास नगर बढ़पुर में आने-जाने वालों का मेला लगा है। लेफ्टीनेंट कर्नल जिस कंझाना गांव में पैदा हुए थे।
वहां भी मातम पसरा है। उनके चाचा राकेश बताते हैं कि उन्होंने रजनीश पांच साल तक यही रहे उसके बाद वह यहां से अपने पिता झब्बूलाल के साथ चले गए। राकेश बताते हैं कि अभी हाल ही में मई के महीने में जब लेफ्टीनेंट कर्नल रजनीश अपने घर विकास नगर आए तो वह इस पैतृक गांव में भी आए थे। रजनीश के शहीद होने के बाद उनका पैतृक गांव कंझाना में रहने वाले सभी लोग आहत हैं। पूरे गांव में मातम पसरा है।
लेफ्टीनेंट कर्नल रजनीश प्रजापति की हेलीकाप्टर दुर्घटना में हुई मौत के बाद पूरा परिवार शोक में है। पत्नी और ले. कर्नल मेघा पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा है। पूना में मेघा और रजनीश नजदीक आएं थे।
अमर उजाला से बातचीत करते हुए रजनीश की बुआ कृष्णा देवी ने बताया कि उनके भाई झब्बूलाल दो साल पहले ही सेना से सेवानिवृत्त हुए हैं। रजनीश की शिक्षा-दीक्षा और देखभाल के लिए बुआ कृष्णा देवी झब्बूलाल के साथ गई। कानपुर, लखनऊ, अंबाला में अपने भाई झब्बूलाल के साथ रहकर उसने रजनीश का पालन-पोषण किया और खुद की पढ़ाई करती रहीं।
सेंट्रल स्कूल अंबाला से रजनीश ने वर्ष 2003 में हाईस्कूल किया और उसी दौरान उन्होंने सेकेंड लेफ्टीनेंट के लिए आवेदन किया। उनका सेलेक्शन हो गया और उन्हें थ्री कोर देहरादून बटालियन में पोस्टिंग मिल गई। कुछ साल के बाद वो लेफ्टीनेंट और इसके बाद मेजर बन गए। इसी दौरान उनका तबादला पूना के लिए कर दिया गया।
इसी बीच उनकी मुलाकात मेजर मेघा से हुई। 25 जून 2007 को पूना में ही मेघा और रजनीश का विवाह हुआ। इसके बाद दोनों लेफ्टीनेंट कर्नल बन गए। मौजूदा समय में लेफ्टीनेंट कर्नल मेघा मातृत्व अवकाश पर हैं।