फर्रुखाबाद। दीपोत्सव की रौनक के बीच शहर की हवा अब खराब होती जा रही है। बढ़ते यातायात, पटाखों के धुएं और कूड़े के जलने से वातावरण में कार्बन व धूल के कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ने लगी है।
बुधवार को हवा में कणिका तत्व (पीएम) 2.5 और अन्य घुलनशील कार्बनिक तत्वों की मात्रा में वृद्धि दर्ज की गई। शहर के मुख्य व आंतरिक बाजारों में दीपोत्सव के कारण यातायात का दबाव लगातार बढ़ा हुआ है। वाहनों के धुएं, आतिशबाज़ी और कूड़े को जलाने जैसी गतिविधियों ने वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। नगर पालिका कर्मियों द्वारा सफाई के बाद कूड़ा और पॉलिथीन जलाने से भी प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ गया है।
मंगलवार रात के बाद से वातावरण में धुंध और धुआं छाया रहा। हवा का एक्यूआई 210 तक जा पहुंचा। बुधवार सुबह भी हवा में प्रदूषण का सूचकांक 184 रहा। तेज़ आवाज वाले और सफेद-गाढ़ा धुआं छोड़ने वाले पटाखों ने सांस लेने में कठिनाई और आंखों में जलन जैसी शिकायतें बढ़ा दीं।
लोहिया अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज पांडेय ने बताया कि दिवाली के दौरान वायु में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। पटाखों से निकलने वाले धुएं में पार्टिकुलेट मैटर, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड जैसे हानिकारक तत्व पाए जाते हैं, जो सांस और हृदय संबंधी मरीजों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। उन्होंने बताया कि पटाखों की तेज आवाज से हृदय गति और रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोगियों के लिए स्थिति जोखिमपूर्ण हो जाती है।
वहीं, धुएं में मौजूद विषैले तत्व दमा और श्वसन रोगियों की परेशानी को और बढ़ा देते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि पटाखा जलने वाले इलाकों से दूरी रखें और बाहर निकलते समय मास्क अवश्य पहनें।
क्या है पीएम 2.5
पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) ऐसे सूक्ष्म कण होते हैं जिनका व्यास 2.5 माइक्रोन या उससे कम होता है। ये इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों की झिल्ली तक पहुंचकर रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे श्वसन, हृदय और फेफड़ों संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। पटाखों, वाहनों के धुएं और कूड़े के जलने से निकले ये कण शहरी प्रदूषण के मुख्य कारणों में से एक हैं।
फोटो- 11, पटाखे जलाने के दौरान उड़ रहा सफेद धुआं। संवाद