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चेचक रोग ने बढ़ाईं आलू किसानों की दिक्कतें

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आलू - फोटो : getty images
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किसानों के लिए आलू की फसल घाटे का सौदा साबित हो रही है। पुराना आलू फेेंकने के बाद अगैती फसल से उम्मीद जगी थी कि उचित दाम मिल सकेगा, लेकिन बाजार के धड़ाम होने से लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। अब आलू में फैल रहे चेचक रोग ने किसानों की दिक्कतें और बढ़ा दी हैं। इसके चलते किसान अपना आलू मंडी में औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर हैं।
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जिले में इस बार 42 हजार हेक्टेयर में आलू बोया गया है। इसमें से लगभग 25 हजार हेक्टेयर में अगैती फसल का आलू शामिल है। पुराने आलू में नुकसान के बाद किसानों को नए आलू की फसल से उम्मीद जगी थी। शुरूआती सीजन में भाव 600-650 रुपये प्रति क्विंटल था, लेकिन 15 दिसंबर के बाद से भाव अब तक 400-450 रुपये प्रति क्विंटल पर आ टिका है। किसान बमुश्किल लागत ही निकाल पा रहा है। अब आलू में चेचक रोग ने किसानों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। आढ़ती सुधीर वर्मा का कहना है कि चेचक रोग से प्रभावित आलू को बाहर के व्यापारी खरीदने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में किसान को अपना आलू स्थानीय व्यापारियों को औने-पौने दाम में बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। 
 
छिड़काव के बाद भी नहीं सुधरी हालत  
कमालगंज निवासी किसान आकाश का कहना है कि उनके आलू में चेचक रोग लग चुका है। कई दवाओं के छिड़काव के बाद भी कोई लाभ नहीं हुआ। वहीं, नगला नान निवासी शिवपाल सिंह बबलू का कहना है कि चेचक रोग के बाबत कोई तकनीकी जानकारी न होने से फसल को चेचक रोग से बचाया नहीं जा सका। ग्राम नौली निवासी अमित का कहना है कि सरकार किसानों के हितों की बात करती है लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। किसान परेशान हैं न तो उसे फसल का उचित दाम मिल रहा है और फसल में लगने वाले चेचक रोग से न कोई निजात। 
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चेचक रोग का कोई इलाज नहीं             
जिला कृषि अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने बताया कि चेचक रोग का कोई इलाज नहीं है। किसानों को चाहिए कि वह आलू बीज का शोधन करके ही बुआई करें। साथ ही आलू की नस्ल में बदलाव करते रहें। खेत में कैल्शियम, बोरान तत्व की पूर्ति करें। डीएपी के स्थान पर सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल करें। इस रोग से बचने के लिए गर्मी के सीजन में खेत को गहरी जुताई कर खुला छोड़ दें जहां तक संभव हो मक्का न बोएं। मोनसरीन दवा इसके लिए कारगर है।
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