छह लोग गंगा में डूबे, दो भाई लापता
फर्रुखाबाद। चचेरी बहन के शव को गंगा में प्रवाहित करने गए लोगों की नाव पलट गई। इससे छह लोग डूब गए। नाविक ने चार लोगों को निकाल लिया, जबकि दो सगे भाई गहराई में समा गए। मगरमच्छ व गंगा की तेज धार से डरे गोताखोरों ने कुछ देर तो भाइयों को तलाशा लेकिन फिर बाहर आ गए। देर शाम तक उनका कुछ पता नहीं चल सका।
मऊदरवाजा थाने के गांव हंसी नगला निवासी रामनिवास की पुत्री लक्ष्मी (14) की शुक्रवार को भोर में मृत्यु हो गई थी। सुबह आठ बजे परिजन उसके शव का जलप्रवाह करने पंखियों की मड़ैया के पास कुबेरपुर घाट पहुंचे। गांव के ही छह लोग नाव में सवार होकर गंगा की बीच धार में पहुंचे। शव प्रवाहित करने का प्रयास करते ही नाव गंगा में पलट गई।
इससे उस पर सवार सभी लोग डूबने लगे। नाविक ने मशक्कत कर एक-एक करके चार लोगों को निकाल लिया। आसपास के तैराकों ने भी गंगा में छलांग लगाई, मगर लक्ष्मी के चचेेरे भाई हरेंद्र यादव (28), बिजेंद्र यादव पुत्रगण स्व. रामवीर का पता नहीं चल सका। सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
गोताखोरों को गंगा में उतारा लेकिन वे जल्द ही निकल आए। दोपहर में तहसीलदार राजू कुमार भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि 20 फीट गहरा पानी है। तेज धार होने से गोताखोर गंगा में उतरने से घबरा रहे हैं। आसपास के लोगों ने वहां बीते दिन मगरमच्छ देखे थे। इस कारण भी गोताखोर घबरा रहे हैं। फिर भी प्रयास किया जा रहा है। शाम चार बजे के करीब एसडीएम सदर अनिल कुमार ने भी मौके पर पहुंचे।
मां की तेरहवीं को लेने जाना था सामान
गंगा में डूबे हरेंद्र और बिजेंद्र के बड़े भाई सुरेंद्र सिंह यादव राजेपुर ब्लाक के परिषदीय स्कूल में शिक्षक हैं। बोले, मां का निधन हो गया था। उनकी दो नवंबर को तेरहवीं थी। अचानक चचेरी बहन की मृत्यु हो गई। सोचा जल्दी से जलप्रवाह करके तेरहवीं का सामान लेने बाजार जाएंगे। अब वह कहीं के नहीं रहे। दो भाई भी गंगा में समा गए।
अफसरों के जवाब से व्यथित दिखे सुरेंद्र
सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने सभी अफसरों से गोताखोर लगवाने की गुहार लगाई। पर कुछ देर ही गोताखोरों ने तलाश की। लोग गंगा में मगरमच्छ की बात कह रहे हैं मगर भैंसों के साथ छोटे-छोटे बच्चे गंगा को पार कर रहे हैं। बोले, एक बड़े अफसर ने तो उनसे कह दिया कि उनके पास चिराग की व्यवस्था नहीं है, जो ढूंढ लाएं।
25 दिन पहले हरेंद्र के हुए थे जुड़वां बच्चे
गंगा में डूबे हरेंद्र के तीन बेटे हैं। 25 दिन पहले दो जुड़वां बेटों ने जन्म लिया था। वह खेती करता है। हरेंद्र के छोटे भाई बिजेंद्र यादव बिजली विभाग में मीटर रीडर है। उसकी एक साल पहले शादी हो चुकी है।