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एसआईटी की जांच के खौफ में फंसा स्वास्थ्य उपकरणों का भुगतान

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फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी की रोकथाम को शहर व ग्रामीण क्षेत्र में लगाई गई सर्विंलांस टीमों को बांटे गए थर्मल स्कैनर व पल्स ऑक्सीमीटरों का भुगतान रोका गया है। जिले में दिल्ली की एक फर्म ने सर्वाधिक उपकरणों की आपूर्ति की थी। कई जिलों में कोरोना किट की खरीद में घोटाले की शिकायत पर शासन ने एसआईटी को जांच सौंपी है। इस कारण ही भुगतान रोका गया है।
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कोरोना काल में संक्रमण की रोकथाम व बचाव को जुलाई में 15 दिन अभियान चलाया गया। इसके लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक 700 से अधिक सर्विलांस टीमें बनाई गई थीं। उन्हें ग्राम पंचायत व नगरपालिका से थर्मल स्कैनर व ऑक्सीमीटर उपलब्ध कराए जाने थे। यहीं पर खेल हो गया और दिल्ली की एक फर्म ने ब्लाक व नगरपालिका में थोक में उपकरण पहुंचा दिए। कमालगंज बीडीओ ने ब्लाक से ग्राम पंचायत सचिवों को उपकरण बांटे जाने को लेकर एडीओ को नोटिस तक दे डाला। वहीं नगरपालिका फर्रुखाबाद के उपकरणों की आपूर्ति सीधे सिविल अस्पताल लिंजीगंज पहुंचा दी गई। तभी कोरोना किट खरीद घोटाले की शिकायत पर शासन से एसआईटी को जांच सौंप दी गई। तब तक जिले की करीब 225 ग्राम पंचायतों में उपकरणों का भुगतान कर दिया गया था। इसमें एक सेट की कीमत 4299 रुपये व 100 रुपये डिलीवरी चार्ज के दिए गए।
इसके बाद प्रमुख सचिव ने जनपद अलीगढ़ में हुई उपकरणों की खरीद का हवाला देते हुए 2800 रुपये में खरीद के आदेश दिए। इस आदेश के आने से पहले ही दिल्ली की फर्म सप्लाई कर चुकी थी। उधर एसआईटी जांच की भनक लगते ही भुगतान थम गया। हालांकि कुछ प्रधानों की मानें तो उपकरणों का नगद भुगतान भी किया गया है। वहीं नगर निकायों ने भुगतान रोक दिया। नगरपालिका फर्रुखाबाद में तो बिना ईओ के ही 120 सेट उपकरणों की आपूर्ति कर दी गई। डीपीआरओ अमित कुमार त्यागी ने बताया कि जिले की ग्राम पंचायतों में कोरोना किट (ग्लब्स, सैनिटाइजर आदि) नहीं खरीदी कई। थर्मल स्कैनर व ऑक्सीमीटर का करीब 225 से अधिक ग्राम पंचायतों में चार हजार से लेकर 4299 रुपये तक का भुगतान किया गया है।
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कैसे होगा भुगतान, क्या कहते हैं जिम्मेदार
नगरपालिका फर्रुखाबाद के ईओ रविंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने 7 जुलाई को योगदान किया है। इससे पहले ही पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर की खरीद हो चुकी थी। दिल्ली की फर्म ने 120 सेट उपकरणों की आपूर्ति नगरपालिका के बजाय सीधे सिविल अस्पताल लिंजीगंज में की थी। अभी भुगतान नहीं किया गया है। वहीं तत्कालीन ईओ रश्मि भारती ने बताया कि उन्होंने दो जुलाई को कार्यभार छोड़ दिया था। उनके कार्यकाल में न तो टेंडर हुए, न वर्क आर्डर और न ही कुटेशन लिए गए। इससे उपकरणों की खरीद का सवाल ही नहीं उठता। उपकरणों की खरीद से उनका कोई लेनादेना नहीं है।
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