फर्रुखाबाद। विकास भवन सभागार में गुरुवार को जिलाधिकारी ने जिला स्वास्थ्य समिति के साथ बैठक की। डीएम ने कोविड कर्मचारियों को दूसरे मद से भुगतान का शासनादेश मांगा। इस पर स्वास्थ्य अधिकारियों की बोलती बंद हो गई। डीएम ने गत माह के 1.25 करोड़ के लंबित मांग पत्र की फाइल रोक दी।
स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिलाधिकारी डॉ.वीके सिंह के सामने मिशन हास्पिटल के निदेशक द्वारा मांगे गए 1.92 करोड़ रुपये भुगतान की फाइल रखी गई। इस पर डीएम ने शासनादेश के अनुसार 27 फरवरी को लखनऊ में होने वाली वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब समिति की बैठक के लिए जवाब तैयार करने के निर्देश दिए। कोविड कर्मचारियों के 1.25 करोड़ रुपये भुगतान की संस्तुति के लिए फाइल सामने पहुंची।
डीएम के पूछने पर बताया गया कि कर्मचारियों का दूसरे मद से दिसंबर तक का भुगतान किया जा चुका है। यह सुनते ही डीएम का पारा चढ़ गया। कहा कि गत माह से अब तक फाइल लंबित क्यों है। दूसरे मद से भुगतान का शासनादेश न दिखाने पर डीएम ने अरविंद कुमार की लताड़ लगाई। सीएमओ से कहा कि इसकी जांच कराएं। यदि वित्तीय अनियमितता मिली तो सीधे एफआईआर कराई जाए।
मातृ स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रमों की प्रगति खराब मिलने पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि निर्देश के बावजूद सीएचसी व पीएचसी की निरीक्षण रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली। तीन दिन में निरीक्षण रिपोर्ट के साथ स्पष्टीकरण भी दें। एसीएमओ व डिप्टी सीएमओ नियमित निरीक्षण करें।
सभी सीएचसी में रात्रिकालीन सेवाएं शुरू करने के साथ डॉक्टर मरीजों के साथ अच्छा व्यवहार करें। सामान्य मरीजों को न तो रेफर किया जाए। न ही बाहर की दवाएं लिखी जाएं। लोहिया अस्पताल की ब्लड बैंक में खून का स्टाक कम होने पर सीएचसी प्रभारियों को सप्ताह में 10-10 यूनिट रक्तदान कराने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए। गर्भवती महिलाओं को पोषाहार न मिलने पर सीडीपीओ को नोटिस देने, तैनाती स्थल पर निवास करने का प्रमाणपत्र देने और सुधार न होने पर निलंबन की संस्तुति करने को कहा।
डीएम ने झोलाछापों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सीएमओ डॉ.अवनींद्र कुमार, डीडीओ श्याम कुमार तिवारी, पीडी कपिल कुमार, एसीएमओ डॉ.रंजन गौतम, डॉ.दलवीर सिंह, डॉ.सर्वेश यादव आदि मौजूद रहे।