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सब्जी की खेती से समृद्ध होकर समाज की बना रहे सेहत

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जिले के किसान भले ही आलू की खेती प्रतिष्ठा से जोड़कर करते हैं। इससे हटकर देखें तो अन्य फसलें भी इससे ज्यादा फायदेमंद साबित होती हैं।
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गांव करनपुर के मजरा बांसमई निवासी प्रवीन ने तकनीक की मदद से सब्जी की खेती अपनाई तो उनकी तरक्की की राह ही खुल गई। ड्रिप सिंचाई पद्धति से वह सिंचाई में खर्च होने वाले 90 फीसदी पानी की बचत करने के साथ तीन गुना फसल का उत्पादन ले रहे हैं। इससे खुद समृद्ध होने के साथ पानी की बचत का संदेश भी दे रहे हैं।
जिले के किसान मुख्य रूप से आलू की खेती करते हैं। प्रतिष्ठा से जुड़ी आलू की फसल में घाटा होने के बाद भी रकवा कम नहीं होता है। वहीं मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव करनपुर के मजरा बांसमई निवासी प्रवीन कुमार खेती करने का तरीका ही बदल दिया।
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पिता की मौत के बाद उन्होंने दिल्ली के लाजपत में प्लास्टिक की सिंचाई पाइप का व्यापार अपने भाई नवीन को सौंप दिया और गांव में आकर खेती करने लगे। उनके पास करीब 60 बीघे खेत है।
चार वर्ष से वे अपने छोटे भाई मनीष के सहयोग से इसमें सब्जी की फसल कर रहे हैं। नई तकनीक अपनाने से उनकी उन्नति की राह खुलती गई। एक वर्ष पहले उन्होंने उद्यान विभाग की सलाह पर ड्रिप सिंचाई पद्धति अपनाई।
इसमें 90 प्रतिशत अनुदान मिलने के साथ करीब सात लाख रुपये खर्च किए। इससे फसल की कम समय में भरपूर सिंचाई के साथ 90 प्रतिशत पानी की बचत भी हो रही है। वहीं पूरे पौधे को जरूरत के अनुसार पानी मिलने से उत्पादन भी तीन गुना हो गया। इस बार उन्होंने गोभी, मिर्च व मोटी मिर्च के साथ सर्वाधिक रकवे में हरी मटर की खेती की।
इसमें उन्हें लाखों रुपये की कमाई हुई। मटर की खेती में प्लास्टिक मल्चिंग कराने से पौध सीधा रहने के साथ फली की संख्या भी बढ़ जाती है।
प्रवीन ने बताया कि उन्होंने पौध तैयार करने के लिए 300 वर्ग मीटर में पॉलीहाउस लगाया है। इस पर बिना अनुदान के साढ़े पांच लाख रुपये खर्च किए। इन दिनों खरबूजा, तरबूज व करेला की पौध तैयार है।
अगाही फसल लगाने से अच्छा रेट मिलेगा। उन्होंने बताया कि सब्जी की खेती तकनीक की मदद से की जाए तो किसी व्यापार से कम नहीं है। इससे उन्हें अच्छा फायदा मिलने के साथ समाज को शुद्ध हरी सब्जी मिलती है।
वह बीज तैयार करने पर अधिक जोर देते हैं। इससे किसानों को उन्नत बीज मिलने के साथ उन्हें अच्छा पैसा भी मिलता है। ड्रिप सिंचाई से फसल में खरपतवार और बीमारी नहीं लगती। इससे कीटनाशक दवाओं का भी कम इस्तेमाल करना पड़ता है।
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सब्जी में शुद्धता रहती है। उद्यान निरीक्षक महावीर सिंह ने बताया कि प्रवीन कुमार आधुनिक तकनीक अपनाकर उन्नतिशील खेती कर रहे हैं। वह उनकी फसलों का निरीक्षण भी करते रहते हैं।
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