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स्तूप पर भीड़ देख भड़के सनातन धर्मी, तनाव

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संकिसा में स्तूप की बाउंड्रीवाल के पास बाहर खड़े सनातन धर्मियों को समझाते एसडीएम अनिल कुमार व सी? - फोटो : FARRUKHABAD
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स्तूप पर विराजमान बिसारी देवी के मंदिर में भीड़ देख सनातन धर्मी भड़क गए। उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इससे तनाव हो गया। सूचना मिलते ही एसडीएम सदर ने पीएसी लगाकर स्तूप से भीड़ को उतरवाया। जवाबी नारेबाजी कर रहे सनातन और बौद्ध धर्मियों को समझाकर हटाया। करीब एक घंटे तक तनाव का माहौल रहा।
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ककइया ईंटों से बने ऊंचे टीले को सनातन धर्मी मां बिसारी देवी का मंदिर बताते हैं, जबकि बौद्ध अनुयायी तथागत भगवान बुद्ध का इसी स्थान पर स्वर्ग से प्रथम आगमन होना मानते हैं। इसी को स्तूप कहते हैं। दोनों पक्षों में स्वामित्व को लेकर विवाद है। रविवार को सुबह से ही स्तूप पर भारी भीड़ चढ़ती रही।
जब धम्मयात्रा पहुंची, तो अतुल दीक्षित, सुशील मिश्रा उर्फ मधुर की अगुवाई में 20-25 सनातन धर्मी पहुंचे। बाउंड्रीवाल के पास खड़े होकर नारेबाजी करने लगे। अतुल दीक्षित ने एसडीएम सदर अनिल कुमार को फोन पर सूचना दी।
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एसडीएम ने तुरंत ही पीएसी, पुलिस लगाकर सभी लोगों को उतार दिया। मुख्य गेट पर तहसीलदार राजू कुमार को खड़ा कर दिया। इसके बाद उन्होंने दोनों पक्षों को समझाकर शांत करा दिया। सनातन धर्मी अतुल दीक्षित ने कहा कि हर साल बैरीकेडिंग होती थी, लेकिन इस बार नहीं कराई गई। इसीलिए लोग मंदिर तक पहुंच गए।
पत्थरबाजी की खबर अफवाह निकली
जब सनातन धर्मी और बौद्ध धर्मियों में नारेबाजी हो रही थी, तो किसी ने पत्थरबाजी की अफवाह फैला दी। इस पर लोग एकत्रित होने लगे। सनातन धर्मियों की अगुवाई कर रहे अतुल दीक्षित ने कहा कि पत्थरबाजी की बात मात्र अफवाह थी। उधर, बुद्ध महोत्सव आयोजक कर्मवीर शाक्य ने कहा कि हम लोग शांति के दूत हैं। कुछ बाहरी युवा नारेबाजी करने लगे थे, उन्हें आयोजकों ने डांट दिया था। हम सब भाई-भाई हैं। किसी ने पत्थर नहीं चलाए।
जानिये: क्या है विवाद
संकिसा गांव से दक्षिण में दिशा में ककइया ईंटों से बना एक ऊंचा टीला है। पुरातत्व विभाग के पत्थर पर इसको स्तूप लिखा गया है। यहां बौद्ध अनुयायी भगवान बुद्ध का अवतरण स्थल बता रहे हैं। मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें सनातन धर्म की ओर से संकिसा निवासी अतुल दीक्षित, पांचाल घाट के संत परमानंद सरस्वती, हनुमान मंदिर भोलेपुर के महंतबाबा बालकदास जी और बौद्ध अनुयायियों की ओर से धर्मलोको बुद्ध विहार प्रबंध समिति त्नके संयोजक कर्मवीर शाक्य पैरोकार हैं।
सनातन धर्म के पांच लोगों ने किया पूजन
अदालती आदेश के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन पहले धम्मयात्रा होगी और बाद में सनातन धर्म के पांच प्रतिनिधि टीले पर विराजमान मां बिसारी देवी का पूजन करने जाएंगे। रविवार दोपहर में सनातन धर्म की ओर से संकिसा प्रधान के देवर अतुल दीक्षित, मेरापुर प्रधान के पति सुशील मिश्र उर्फ मधुर, बाबा बालकदासजी, सद्दाम सिंह, सुरेंद्र सिंह और जितेंद्र यादव मां बिसारी देवी की पूजा करने गए।
बौद्ध अनुयायियों के दो ग्रुप में तकरार
संकिसा शांति संदेश यात्रा लेकर पहुंचे यूथ बुद्धिस्ट सोसायटी आफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश बौद्ध और प्रदेश अध्यक्ष तीर्थराज बौद्ध कई युवाओं के साथ स्तूप पर पूजा-अर्चना करने को चढ़ने लगे। इस पर बुद्ध महोत्सव के संयोजक कर्मवीर शाक्य ने उन्हें ऊपर जाने से रोक दिया।
इस पर दोनों पक्षों में जमकर तकरार हुई। काफी देर तक तूतू-मैमै के बाद भिक्षु धम्मपाल थैरो ने सभी को बैठाकर स्तूप का असली स्वरूप प्रस्तुत किया। कहा कि यहां भगवान बुद्ध आए थे। यह पवित्र स्थल है। यहां हम अपने चरण रखेंगे, तो तथागत का अपमान है। लोगों के समझ में आया और नीचे ही पूजा अर्चना करके लौट गए।
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