कायमगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत सिकंदरपुर अगू में विकास के नाम पर पांच
साल में लाखों रुपयों का गोलमाल हुआ है। जिलाधिकारी के आदेश पर सीडीओ ने
इस मामले की जांच बैठा दी है। सीडीओ ने चार सदस्यीय कमेटी गठित कर भौतिक
सत्यापन का आदेश दिया है।
ग्राम पंचायत सिकंदरपुर अगू में विकास के नाम
पर विभिन्न योजनाओं एवं मनरेगा के तहत पांच साल में 63.23 लाख रुपये खर्च
हुए। फिर भी मजरों को विकास नहीं हो सका। इसकी हकीकत 25 जून को अफसरों के
निरीक्षण में खुली। यहां तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी राजीव श्रीवास्तव से
पांच साल में कराए गए कार्यों के अभिलेख मांगे गए। उन्होंने अभिलेख नहीं
दिए।
सीडीओ ने मनरेगा के तहत एमआईएस पर कराए गए कामों की रिपोर्ट निकलवाई।
इसमें रामेश्वर के घर से बूढ़ी गंगा तक चकरोड पर मिट्टी व मरम्मत कार्य एवं
प्राथमिक पाठशाला के पास तालाब जीर्णोद्धार के 12 दिन के मस्टर रोल निर्गत
हुए मिले। हकीकत में कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया। इसके स्थलीय निरीक्षण
में रामेश्वर के घर से बूढ़ी गंगा तक खड़ंजा कार्य राज्य
वित्त से कराया
गया मिला। इसी काम के मनरेगा के तहत दोबारा मस्टर रोल जारी कर धन निकाला
जाना मिला। बैंक खाते के स्टेटमेंट में वर्ष 2012 में 23,23,360 रुपये खर्च
किए जाने का उल्लेख था। इसी ग्राम पंचायत में वर्ष 2010 से अब तक लगभग 40
लाख रुपये का भुगतान विभिन्न योजनाओं के तहत काम दिखाकर लिया गया है। इसके
सापेक्ष मात्र
तीन गलियों में निर्माण मिला है। विकास के नाम पर बैंक से
धनराशि निकाली गई है वह नियम विरुद्ध निकाली गई।
विकास के नाम पर हुए
घोटाले को लेकर जिला पंचायत अधिकारी ने ग्राम पंचायत अधिकारी राजीव
श्रीवास्तव को नोटिस जारी कर आरोप पत्र दिया था। उन्होंने नोटिस का जवाब
नहीं दिया। विकास के नाम पर धन निकाल कर हड़प लेने के
मामले की जांच के
लिए मुख्य विकास अधिकारी एसएन शुक्ला ने चार सदस्यों की जांच कमेटी बना दी
है। इसमें परियोजना निदेशक डा. दयाराम विश्वकर्मा, जिला पंचायत अभियंता
बजरूद्दीन, खंड विकास अधिकारी कायमगंज विमलादेवी, सहायक लेखाकार मोतीलाल
कपूर को शामिल किया गया है। कमेटी के सदस्यों को भौतिक एवं अभिलेखीय
सत्यापन किए जाने का आदेश दिया है।