बरसात रुक नहीं रही है। शुक्रवार के बाद शनिवार को भी बरसात हुई। इससे
खेतों में कटने के लिए और कटी पड़ी फसलों पर तबाही की आशंकाएं बढ़ गई हैं।
इससे किसान मुश्किल में हैं। इन्हें परिवार की गुजर भर के लिए गेहूं न मिल
पाने का डर सता रहा है। बरसात से सबसे ज्यादा नुकसानी गेहूं व तंबाकू की
फसल में है। खेतों में पुआल से ढंका आलू सड़ने लगा है। आम का
बौर भी काला
पड़ रहा है। वहीं बरसात के साथ ही आंधी से तार टूटने के चलते बिजली आपूर्ति
पर भी संकट खड़ा हो गया है। जिले में अलग अलग हिस्सों में तारों के टूटने
आपूर्ति ठप हुई है। जिले में शुक्रवार को 5 मिलीमीटर बरसात हुई। शनिवार
को भी मौसम का मिजाज बिगड़ा रहा और 3.3 मिली मीटर पानी बरसा। इससे गेहूं
के दाने काले पड़ने की नौबत है। मार्च में हुई
बरसात से गेहूं के पसरने से
पैदावार में 30 फीसदी के करीब गिरावट पहले ही आंकी जा रही थी। अब दानों के
काले पड़ने की आशंकाएं हैं। राजेपुर के किसान शिवओम, दीनानाथ, नवाबगंज के
किसान राजू, महेश, कमालगंज के किसान राजेश, सुरेश चंद्र का कहना है कि आंधी
व बरसात से खेतों में पड़े गेहूं के गट्ठे उड़ गए। भीगने से दाने काले पड़
जाएंगे। इस बार साल भर के
खाने के लिए गेहूं मिल जाए तो बहुत है।
मवेशियों के लिए भूसा का भी संकट रहेगा। मक्का की फसल पर भी शुरुआत में
ही ग्रहण लग गया है। बरसात व तेज हवाओं से मक्का की फसल भी पसर गई है।
इससे भी नुकसानी का संकट है। किसान रघुवीर सिंह कहते हैं कि तेज हवाएं व
बरसात न रुकी तो मक्का की भी पैदावार गिरेगी। मौसम के तेवर आम की फसल के
लिए भी
खतरा बने हैं। बौर झर रहा है। काला भी पड़ने लगा है। छोटी अमिया भी
टूट कर गिरी हैं। कायमगंज इलाके के बागवान देवपाल, नगला खैरबंद के बागवान
लालता प्रसाद कहते हैं कि बरसात व हवाओं से 20 से 30 फीसदी आम की फसल को
नुकसान हुआ है। खेतों में पुआल से ढका आलू सड़ने लगा है। कृषि विशेषज्ञ
अतर सिंह यादव का कहना है कि तेज हवाओं व बरसात के साथ ही दिन की कड़क धूप
फसलों के लिए खासी नुकसानदेह है।