मजहब का पर्दा हटाकर देखो तो इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। इस धर्म को जिसने अपना लिया, फिर उसके लिए कोई पराया नहीं रह जाता। धर्म कोई भी हो, लेकिन धार्मिक आयोजन सभी अपने ही होते हैं।
ऐसी ही सोच रखने वाले जनपद कन्नौज के मुन्ना मियां के परिवार ने मजहबी बेड़ियां तोड़ने को धार्मिक आयोजनों को ही सहारा बना लिया। वह परिजनों के साथ दशहरा में पुतले बनाते हैं तो नवरात्र में झांकियां सजाने का काम करते हैं। मोहर्रम आने पर ताजिया बनाने का कारोबार करते तो दीपावली में पटाखे का व्यापार कर रोशनी का त्योहार मनाते हैं।
फतेहगढ़ के परेड ग्राउंड पर इन दिनों दशहरे की तैयारी चल रही है। इसी मैदान में रावध वध की लीला के मंचन के साथ पुतला दहन किया जाता है। जनपद कन्नौज के अरौल निवासी मुन्ना मियां के पास रावण, कुंभकरण व मेघनाद के पुतले बनाने का ठेका है। वह पिछले 30 वर्ष से पुतले बना रहे हैं। उनके साथ भाई अरशद, नदीम, शाहिद के अलावा यामीन व न्याज भी हाथ बटाते हैं।
बातचीत के दौरान वहां मौजूद नदीम, यामीन आदि ने बताया कि त्योहार सभी दिलों को मिलाने का एक माध्यम है। कोई भी धर्म बैर रखने की इजाजत तक नहीं देता। उनके लिए तो धार्मिक आयोजन मजहबी बेड़ियां तोड़ने का सहारा बन गए हैं। वह दशहरा में पुतले बनाने के साथ त्योहार भी उतने ही उत्साह से मनाते हैं।
नवरात्र के पर्व पर वह झांकियां सजाने काम करते हैं। इससे उन्हें रोजगार भी मिलता है और सभी से दिल जोड़ने का मौका। मोहर्रम आने पर वह लोग ताजिया बनाते हैं। दशहरा के बाद अब वह दीपावली की तैयारी में जुट जाएंगे। पटाखा बनाने का उनके पास स्थायी लाइसेंस है।
दीपावली पर वह पटाखों का व्यापार करने के साथ धूमधाम से त्योहार भी मनाते हैं। यह भी कहा कि मजदूरी तो कहीं भी की जा सकती है। लेकिन मजहबी बेड़ियां तोड़ने के साथ यदि रोजगार भी मिलता रहे, तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है। इस बार परेड ग्राउंड पर रावण का पुतला 40 फीट, जबकि कुंभकरण व मेघनाद के पुतले 30-30 फीट के बनाए जा रहे हैं।