चरित्र निर्माण शिविर में आयोजित संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए आचार्य चंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि गौ की रक्षा, गंगा की पवित्रता और गायत्री का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। भगवान श्री कृष्ण के देश में जहां गाय के दूध की नदियां बहा करतीं थीं वहीं आज इनका रक्त बहाया जा रहा है।
कृष्ण की उपासना से पहले गाय की रक्षा करें। संत ज्ञानार्थी जी ने कहा कि हिंदू समाज में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। फिर भी सनातन धर्म को मानने वाले गाय को खरीदते और बेंचते हैं। इसी कारण हिंदुओं का पतन हो रहा है। उन्होंने गऊ पालन की अपील की। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे महंत सोमवार पुरी ने कहा कि गौ, गंगा की रक्षा के लिए साधु संतों को आगे आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म पर जब भी संकट आया, तब तब साधु संतों ने अपने प्राणों की आहुति देकर इसकी रक्षा की है। स्वामी कृष्णानंद ने कहा कि गऊ, गंगा और गायत्री वेदमाता की गोद में सुरक्षित हैं। उन्होंने सभी से वेदों में बताए गए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। सम्मेलन में स्वामी सत्यस्वरूप ब्रह्मचारी, स्वामी विभु जी, स्वामी बजरंग दास ने विचार रखे। पंडित धर्म मुनि, डा. शिवराम आर्य, शिव कुमार यादव, निर्मला देवी, सीमा यादव, संध्या आर्या, उदिता आर्या, अशोक कटियार, मुन्ना यादव, रेनू, रितु, दीपक, सोहित, प्रिया, नीलम आर्या आदि मौजूद रहीं।
राशन लेने को लगी भीड़
मेले में राशन की दुकानों से केरोसिन लेने के लिए कल्पवासियों की भीड़ लगी रही। कल्पवासी महिलाओं के साथ ही मेले में राम नाम जपने के लिए आए साधु संत भी केरेासिन लेने का मोह त्याग नहीं सके। साधु भी हाथ में डिब्बा लेकर केरोसिन के लिए कतार में दिन भर डटे रहे। कल्पवासी डिब्बा न होने पर बाल्टियों में केरोसिन लेने पहुंचे।