फर्रुखाबाद। करीब एक सप्ताह से मौसम खुलने के बाद शुक्रवार को हुई रिमझिम बारिश ने आलू की बुआई पर फिर ब्रेक लगा दिया है। शीतगृहों में आलू की निकासी भी थम गई है। शासन ने 31 अक्तूबर तक शीतगृह खाली करने के निर्देश दिए हैं। अभी करीब 63 फीसही शीतगृहों में भंडारित आलू की एक माह में निकासी चुनौती साबित होगी।
जनपद में किसान प्रमुख रूप से आलू की खेती करते हैं। आलू की कच्ची फसल के लिए किसान 15 सितंबर के बाद बुआई कर देता है। इस बार बारिश होने के बाद करीब एक सप्ताह से मौसम साफ हुआ तो किसान खेत तैयार करने लगे थे। कुछ किसानों ने बुआई भी शुरू कर दी थी। शुक्रवार को सुबह से हुई बारिश से आलू की बुआई फिर बाधित हो गई। इससे किसान चिंतित हैं।
जनपद में 107 शीतगृहों में 10 लाख 17 हजार 918 मीट्रिक टन आलू भंडारण की क्षमता है। इसके सापेक्ष शीतगृहों में आठ लाख 62 हजार 991 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया था। उद्यान विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अब तक करीब 37 फीसदी ही आलू की निकासी हो सकी है, जबकि 63 फीसदी आलू अभी भंडारित है। शासन से 31 अक्तूबर तक शीतगृह खाली करने के निर्देश हैं। भाव में करीब 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट से आलू की निकासी काफी धीमी है।
आलू की बुआई शुरू होने से, भाव बढ़ने के साथ निकासी भी तेज होने की उम्मीद थी। बारिश होने से जहां आलू की बुआई पर ब्रेक लग गया, वहीं निकासी भी थम गई। एक ओर आलू की बुआई लेट होने से किसान तो दूसरी ओर निकासी थमने से शीतगृह संचालक चिंतित हैं।
नवंबर में बाजार में नए आलू की दस्तक हो जाती है। शीतगृहों में अधिक आलू डंप होने से भाव बढ़ने की उम्मीद भी कम है। इससे किसानों को निराशा नजर आ रही है। 31 अक्तूबर तक शीतगृह खाली करना भी चुनौती है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिला आलू एवं शाकभाजी विकास अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि आलू की निकासी अभी धीमी है। बुआई शुरू होते ही आलू की निकासी भी तेज होगी। निर्धारित समय पर शीतगृह खाली करने के निर्देश दिए हैं। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि मौसम खराब होने के चलते किसान अभी एक एक सप्ताह आलू की बुआई रोक दें। जिन खेतों में आलू बोया जा चुका है, उनमें भरा बारिश का पानी निकाल दें। इससे नुकसान बचाया जा सकता है।