बुधवार से शुरू हुईं परिषदीय स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं में अव्यवस्थाएं
हावी रहीं। कक्षा एक से तीन और छह से आठ की प्रथम पाली में हिंदी विषय
की परीक्षा 10.30 से 12.30 बजे तक हुई और द्वितीय पाली 1.30 से 3.30 बजे तक
कक्षा चार और पांच की हिंदी, छह से आठ की कला विषय की परीक्षाएं कराई
गईं। किसी स्कूल में जूनियर कक्षाओं के प्रश्नपत्र
शिक्षकों ने बाजार से
खरीद कर वितरित किए तो कहीं शिक्षकों ने खुद पेपर आनन-फानन में बनाए।
इन्हें ब्लैक बोर्ड पर लिख दिया गय। नौनिहालों ने ब्लैक बोर्ड से प्रश्न
देख एक दूसरे की कापी से नकल टीप उत्तर लिखे। यहां तो नौनिहालों में
शुरुआती दौर में नकल की आदत पड़ रही है। प्रथम दिन परीक्षा में लगभग 30
फीसदी नौनिहाल शामिल नहीं हुए। परिषदीय स्कूलों की पहले दिन की परीक्षा की
अमर उजाला की आंखों देखी रिपोर्ट।
शांति जूनियर हाईस्कूल भोलेपुर
यहां
तीन विद्यालय एक परिसर में संचालित हैं। शांती जूनियर हाईस्कूल में
पंजीकृत 53 में 50 बच्चे उपस्थित हुए। प्राथमिक विद्यालय नगलादीना बालक में
36 में 22 और नगला दीना बालिका में 40 में 10 बच्चे परीक्षा देने आए। यहां
पर भी यही हाल रहा।
प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन
यहां
पर पंजीकृत 134 में 65 ही बच्चे परीक्षा देने को उपस्थित हुए। ब्लैक बोर्ड
पर प्रश्न लिखे गए थे । बच्चों को बाजार से खरीद कर जो कापियां दी गईं।
इनमें बच्चों ने प्रश्नों के उत्तर लिखे। यहां भी नौनिहालों ने एक स्थान पर
बैठकर एक दूसरे की कापी देख परीक्षा दी।
प्राइमरी स्कूल महुलिया
यहां
28 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें 6 बच्चे की परीक्षा देने आए थे। यह ब्लैक
बोर्ड पर प्रश्न व उत्तर दोनों लिखे गए थे। स्कूल की फर्श टूटी पड़ी थी।
बाजार से खरीदकर दी गईं उत्तर पुस्तिकाएं
ब्लाक क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में चल रही परीक्षा बदइंतजायिाें के
बीच हुई। बच्चे झुंड बनाकर परीक्षा देते नजर आए। प्रश्नपत्रों के बजाए
ब्लैकबोर्ड पर प्रश्न लिखे गए थे। कहीं-कहीं तो उत्तर पुस्तिकाएं बाजार से
खरीदकर लाई गईं।
प्राथमिक विद्यालय चिलसरा प्रथम
समय 11.45 बजे
प्राथमिक
विद्यालय चिलसरा प्रथम में कक्षा 4 व 5 के बच्चे एक ही कक्ष में झुंड
बनाकर परीक्षा दे रहे थे। कक्षा 4 के बच्चों को प्रश्न ब्लैकबोर्ड पर लिखे
गए थे। कक्षा 5 के बच्चों के हाथों में प्रश्नपत्र थे। एक अन्य कमरे में
कक्षा 3 के बच्चोें को भी प्रश्न पत्र दिए गए थे।
प्रधानाध्यापिका अफरोज
अल्वी ने बताया कि परीक्षा की पहले से कोई जानकारी नहीं थी। बुधवार को ही
जानकारी हुई। आनन-फानन में बाजार से उत्तर पुस्तिकाएं खरीदकर बच्चों को दी
गईं। कोई स्कीम भी नहीं थी इसलिए हिंदी का पेपर करवा दिया। कक्षा 5 में 10
बच्चों के बजाए आठ, कक्षा 4 में 28 के बजाए 24 और कक्षा 3 में 41 बच्चों को
सापेक्ष 29 बच्चे ही परीक्षा दे रहे थे।
प्राथमिक विद्यालय नगला नान
समय 11 बजे
प्राथमिक
विद्यालय नगला नान में ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखे थे। इन्हें बच्चे कापी
में लिख रहे थे। कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे एक ही कक्ष में बैठकर परीक्षा
देते नजर आए। कक्षा 5 में 11 के बजाए 7, कक्षा 3 में 7 के बजाए 5 और कक्षा 2
में पंजीकृत 9 बच्चों के सापेक्ष 6 बच्चे परीक्षा दे रहे थे।
प्रधानाध्यापिका रमन गंगवार ने बताया कि पहली पाली में हिंदी का पेपर था।
दूसरी पाली में पर्यावरण का पेपर है।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय असगरपुर
समय 10.50 बजे।
पूर्व
माध्यमिक विद्यालय असगरपुर में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चे अलग-अलग कमरों
में परीक्षा दे रहे थे। इन बच्चों को प्रश्नपत्र दिए गए थे। बच्चे ही पूरी
तन्मयता के साथ प्रश्नपत्र हल करने में लगे थे। यहां भी बच्चे गैरहाजिर
रहे। कक्षा 8 में पंजीकृत 12 बच्चों के सापेक्ष 10, कक्षा 7 में 27 के
सापेक्ष 25 और कक्षा 6 में पंजीकृत 14 बच्चों के सापेक्ष 13 बच्चे ही
परीक्षा देने आए। प्रधानाध्यापक नूर अली ने बताया कि बच्चों को परीक्षा के
लिए प्रश्नपत्र दिए गए। गैरहाजिर बच्चों के बारे में पूछे जाने पर वह
चुप्पी साध गए।