फर्रुखाबाद। मोहल्ला अंडियाना स्थित दरगाह में हजरत कय्यूम शाह के उर्स में भारी भीड़ उमड़ी। अकीदत के माहौल में गागर व चादर जुलूस उठा। इसके बाद कव्वालियों की महफिल सजी । इस दौरान मुल्क की तरक्की व खुशहाली की दुआ मांगी गई।
अंडियाना स्थित दरगाह में हजरत कय्यूम शाह का उर्स धूमधाम से मनाया गया। अकीदतमंदों ने नातिया कलाम पेश किए। यहां सूफी रशीद मियां ने संबोधित करते हुए कहा कि सूफी संतों ने पैगंबरे इस्लाम से मोहब्बत करने के साथ उनके उद्देश्यों को अपनाया और अमल किया। उन्होंने कहा कि सूफी संतों ने एकता, समानता, सद्भावना के मूल मंत्र से समाज को एकसूत्र में पिरो दिया। दरगाहों से यही पैगाम आज भी प्रसारित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नमाज पाबंदी से अदा करते रहो, माता-पिता और बड़ों का अदब करो। तमाम परेशानियों के बावजूद सच्चाई पर कायम रहो। इस पर अमल करते रहोगे तो जिंदगी आसान बन जायेगी।
इस मौके पर महान सूफी संत की मजार पर अकीदतमंदों ने फूल-मालाएं चढ़ाई और मुरादों से झोलियां भरीं। दिलशाद रहमानी ने कलाम पेश किया, नहीं तुमसा कोई महबूबे सुबहानी, अली फातिमा का राहते जानी। मास्टर लड्डन ने नात पेश की, कुछ भी जो तेरे करम की नजर नहीं, सब कुछ है तेरी एक करम की निगाह में। इसके अलावा सिराजुद्दीन ने नातिया कलाम पढ़ा। मोहम्मद सलीम, मोहम्मद तस्लीम, ताज मोहम्मद, मोहम्मद ताहिर, मोहम्मद अनवार, दीन मोहम्मद, फिरोज अहमद, नूर हसन, गुलाम साबिर आदि मौजूद रहे।
सूफी कमरुद्दीन को दी गई श्रद्धांजलि
दरगाह पर सज्जादानशीन रहे सूफी कमरुद्दीन मियां को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। अकीदतमंदों ने उनकी मजार पर फूल-मालाएं चढ़ाई और कुरआन-ख्वानी का आयोजन किया गया। रशीद मियां वेेारसी ने बताया कि कमरुद्दीन मियां को सूफी संतों से गहरा लगाव था और उन्होंने ही उर्स की परंपरा डाली थी।