कई सांसदों का कार्यकाल हो रहा है खत्म
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समाजवादी पार्टी में आपसी खींचतान चरम पर है। पार्टी के नेता आपस में ही शत मात के खेल में उलझे हुए हैं। लोकसभा चुनाव में अपनों से मिली मात का बदला लेने के लिए विधानसभा चुनाव से पहले ही चौसर बिछाई जा रही है।
लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने तत्कालीन राज्यमंत्री नरेंद्र सिंह यादव के बेटे सचिन यादव को प्रत्याशी घोषित किया।
बाद में टिकट बदल कर अलीगंज विधायक रामेश्वर यादव को थमा दिया। इस पर सपा प्रत्याशी रहे रामेश्वर सिंह यादव के सामने तत्कालीन राज्यमंत्री और अमृतपुर से विधायक नरेंद्र सिंह यादव के बेटे सचिन यादव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर गए। उन्हें मनाने की कवायद फेल रही। यह सीट भाजपा के मुकेश राजपूत के हिस्से गई। स्थिति यह रही कि चुनाव के बाद अलीगंज विधायक रामेश्वर सिंह और अमृतपुर विधायक नरेंद्र सिंह के खेमे के बीच जमकर शह मात का खेल चला। रामेश्वर सिंह यादव के बेटे डा. सुबोध यादव ने एटा छोड़ फर्रुखाबाद में अपनी सियासी जमीं तैयार करना शुरू किया।
पंचायत चुनाव से लेकर ब्लाक प्रमुखी के चुनाव तक में जोर आजमाइश हुई। डा. सुबोध खुद राजेपुर से ब्लाक प्रमुख बन गए। वह स्थायी रूप से यहां के निवासी भी बन गए हैं। अमृतपुर से विधायक नरेंद्र सिंह यादव दोबारा इस सीट पर दावा कर रहे हैं। ऐसे में सचिन यादव की तर्ज पर डा. सुबोध यादव सपा हाईकमान से अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांग रहे हैं। डा. सुबोध यादव का कहना है कि वह हर हालत में अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लडेंगे।
सपा मुखिया मुलायम सिंह के समक्ष उन्होंने टिकट के लिए दावा ठोंक दिया है। कुल मिलाकर 2017 में होने जा रहा विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव का इतिहास दोहराकर समाजवादी पार्टी के बीच चल रही अंर्तकलह को और बढ़ावा देगा।