दिवाली से पहले शहर को जगमग करने के दावे और वादे हवा हवाई साबित हुए हैं। सभासदों का असंतोष दूर करने को कंडम हो चुकी पीली लाइटों की मरम्मत शुरू कर दी गई है।
इसके लिए मोटी रकम से जरूरी सामान खरीदा जा रहा है। सभी वार्डों में 10-15 लाइटें सही करने का काम प्रारंभ किया गया है।
शासन के निर्देश हैं कि सभी रोड लाइटें एलईडी होनी चाहिए, मगर शहर में हालात अलग हैं। यहां करीब पांच हजार लाइटें अभी भी 70 और 250 वाट की पीली रोशनी वाली लगी हुई हैं। इससे बिजली की जमकर बर्बादी हो रही है। कई साल से नगर पालिका का बिजली महकमा लाइटों की खरीद नहीं कर सका है।
बीते महीने पालिका के जिम्मेदारों ने दिवाली से पहले ही पूरे शहर को जगमग करने का एक बयान जारी किया था। यह बात जनता ने सुनी, तो सभासदों से लाइटें लगाने की मांग शुरू हो गई।
सभासदों ने यह बात ईओ रविंद्र कुमार के सामने रखी, तो उन्होंने दिवाली से पहले हर हाल में लाइटें देने का भरोसा दे दिया। पहले एक नवंबर तक देने की बात कही, फिर छह-सात नवंबर तक।
बावजूद इसके सोमवार तक किसी भी वार्ड में नई एलईडी लाइटें लगना शुरू नहीं हुईं। इससे सभासदों में असंतोष है। सभासदों के गुस्से को शांत करने के लिए पालिका ने कई साल से बंद पड़ी कंडम हो चुकीं लाइटों की मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इसे पूरा करने के लिए मरम्मत का सामान खरीदा जा रहा है।
नगर पालिका सवा दो करोड़ से 120 और 45 वॉट की एलईडी लाइटें खरीदने जा रही है। इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि पालिका प्रशासन शीघ्र ही आपूर्ति आने की बात कह रहा है। यदि आपूर्ति आ गई, तो इस वक्त कंडम लाइटों को सही करने में खर्च हो रही मोटी रकम बेकार हो जाएगी क्योंकि तब ये लाइटें उतारकर स्टोर में डाल दी जाएंगी।
‘अभी नई लाइटें मिलने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में त्योहार के समय अंधेरा ठीक नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण स्थानों पर बंद लाइटों की मरम्मत करके रोशनी की जाएगी।’
-रविंद्र कुमार, ईओ, नगर पालिका