फर्रुखाबाद। कोरोना महामारी के बीच गैरप्रांतों और महानगरों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक घर लौट रहे हैं। इन्हें रोजगार देने के लिए ग्राम पंचायतों में होने वाले विकास कार्य मनरेगा से कराए जाएंगे। सामग्री पर होने वाला खर्च 14वें व राज्य वित्त की धनराशि से होगा। 20 प्रतिशत मजदूरी मनरेगा से खर्च की जाएगी।
पंचायती राज निदेशक किंजल सिंह ने डीपीआरओ को भेजे आदेश में कहा है कि कोविड-19 महामारी से बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर गांवों में पहुंच रहे हैं। इनकी आजीविका पर संकट है। प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए पंचायती राज विभाग को जिले में चार लाख 18 हजार मानव दिवस का लक्ष्य दिया गया है। पंचायतीराज विभाग से 14वें वित्त व राज्य वित्त से ग्राम पंचायतों व क्षेत्र पंचायतों को मिली धनराशि का 20 प्रतिशत धन मनरेगा कन्वर्जेंस से खर्च किया जाएगा। ग्राम पंचायतों में कन्वर्जेंस से कराए जाने वाले कार्यों का एस्टीमेट तैयार कर मनरेगा के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्वीकृत कराया जाए।
उपनिदेशक पंचायती राज अभय कुमार शाही ने बताया कि ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय, पंचायत घर व परिषदीय विद्यालय की बाउंड्री के निर्माण में सामग्री की खरीद राज्य वित्त व 14वें वित्त आयोग की धनराशि से की जाएगी। मजदूरी मनरेगा कन्वर्जेंस से दी जाएगी। निर्माण के एस्टीमेट में ही मनरेगा कन्वर्जेंस का आगणन शामिल कर स्वीकृत कराने के साथ ऑनलाइन अपलोड करना होगा।
14वें व राज्य वित्त में जिले को 101 करोड़ आवंटित
ग्राम पंचायतों में विकास कार्य के लिए जनपद को 101 करोड़ 28 हजार 610 रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे विकास कार्यों से प्रवासियों को रोजगार मिलने की राह खुलेगी। शासन से धनराशि आवंटन के साथ चार लाख 18 हजार मानव दिवस का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उपनिदेशक पंचायतीराज अभय कुमार शाही ने बताया कि शासन से 14वें व राज्य वित्त की धनराशि जल्द जनपदों को हस्तांतरित की जाएगी।