फर्रुखाबाद। आसमान में बादल छाए होने से खेतों में आलू के ढेर लगाए किसानों की चिंता बढ़ गई है।
जनपद के शीतगृहों में आलू भंडारण लगभग पूर्ण बताया जा रहा है। वहीं, सातनपुर मंडी में आलू का भाव भी काफी कम है। भाव बढ़ने की उम्मीद और शीतगृह का भंडारण शुल्क बचाने के चक्कर में किसानों ने अपने खेतों में ही आलू के ढेर लगाकर उसे पुआल से ढक दिया है। आलू बेचने के लिए किसानों को मंडी में भाव बढ़ने का इंतजार है।
गुरुवार सुबह से ही बादल छाए हैं। कुछ स्थानों पर फुहारें भी पड़ी। इससे किसानों को खेत में लगे आलू का ढेर बचाने की चिंता बढ़ गई है। शीतगृह में भंडारण के लिए जगह नहीं है। भाव की मंदी से इन दिनों आलू बेचने में उन्हें घाटा हो रहा है। अब आलू का ढेर बचाना उनके लिए चुुनौती है।
किसानों ने बयां किया दर्द
फोटो -18, किसान अजय यादव
मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव बैरामनगर निवासी अजय यादव ने बताया कि दो दिन शीतगृह में आलू भरा ट्रैक्टर-ट्राली खड़ा रहा। इसके बावजूद आलू भंडारित नहीं हो सका। खेतों में ही 800 पैकेट आलू का ढेर लगा दिया है। अप्रैल में आलू बेचेंगे। यदि बारिश हुई तो आलू में बड़ा नुकसान होने का भय सता रहा है।
फोटो - 17, किसान अनिल यादव।
बैरामनगर निवासी अनिल यादव ने बताया कि करीब 500 पैकेट आलू का ढेर खेत में लगा है। भाव सस्ता होने से आलू नहीं बेचा। भाव बढ़ने की उम्मीद है। अप्रैल में आलू बेचेंगे। बरसात होने से नुकसान हो सकता है। पॉलिथीन से ढकने पर भवका लगकर आलू सड़ सकता है।
अभी 10 प्रतिशत आलू खेतों में लगा
आलू विकास अधिकारी आरएन वर्मा ने बताया कि जिले में करीब पांच प्रतिशत आलू की खोदाई शेष है। जबकि दस फीसदी आलू को किसानों ने खेतों में ढेर लगाकर संरक्षित किया है। शीतग़ृहों में 85 प्रतिशत भंडारण हो चुका है। यदि किसी किसान को भंडारण में समस्या आए तो वह उनसे मोबाइल नंबर 8077622392 पर संपर्क कर सकता है।
फोटो -22, कृषि वैज्ञानिक अभिमन्यु यादव।
आलू बचाने के लिए ऊंचे स्थान पर लगाएं ढेर
कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक अभिमन्यु यादव ने बताया कि आलू के ढेर को बारिश से बचाने का इंतजाम करें। बारिश में यदि आलू भीग जाए तो आलू का स्थान बदलकर दें और ऐसे स्थान पर रखें जहां हवा लगे। ढेर ऊंचे स्थान पर लगाएं, ताकि नीचे पानी न पहुंचे। कटा, सड़ा आलू ढेर में न रखें। कुछ दिनों के अंतराल पर छंटाई कर आलू की ग्रेडिंग करते रहें। यदि बारिश से भीगे आलू को छाया में सुखाने की जगह न हो तो उसे दो-चार दिन में बेच दें। इससे नुकसान को काफी हद तक बचाया जा सकता है।