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Farrukhabad News: धीमी निकासी से तेज हो गए आलू के भाव

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फर्रुखाबाद। आलू के भाव लगातार चढ़ रहे हैं। अभी इनमें और इजाफा होने का अनुमान है। राहत नया आलू आने के बाद ही मिलेगी। ये हालात धीमी निकासी के चलते बने हैं। जरूरतमंद किसान ही आलू निकाल रहे हैं। कारोबारियों ने निकासी रोक रखी है। इन्हें आलू और महंगा होने का इंतजार है। पिछले सालों के आंकड़ों से अब तक 30-35 फीसदी निकासी हो जानी चाहिए थी। इस बार अभी तक 22 फीसदी आलू ही बाजार में आया है। लगभग 70 फीसदी शीतगृहों में है।
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बाजार में आलू 30 से 35 रुपये किलो बिक रहा है। ये नौबत मांग के मुताबिक बाजार को आपूर्ति न होने से है। इस बार सूबे की आलू बेल्ट और गैर प्रांतों में पैदावार कम हुई। इससे सीजन की शुरुआत में आलू महंगा बिका।
बाजार का रुख देख कारोबारियों ने बडी खरीद कर ली। यह कोल्ड स्टोरेज में भंडारित है। ये आलू के और मंहगा होने पर ही निकासी करेंगे। इससे बुवाई के दौरान और दाम चढ़ सकते हैं।
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किसान भी जरूरत भर का आलू निकाल के बेच रहे हैं। इन दिनों शीत गृहों से 750 से 900 क्विंटल रोज निकासी हो रही है। इसमें से 450 से 600 क्विंटल के करीब बिहार, असम, सिल्चर, पूर्वांचल में आज़मगढ़, मुगलसराय, कछुआ, जौनपुर, सुल्तानपुर की मंडियों में जा रहा है। बाकी की खपत घरेलू बाजार में हो रही है।


ये भी हैं दाम बढ़ने की वजह
- इस बार खूब गर्मी पड़ी। तापमान चढ़ा रहा। अब उमस का मौसम। इससे भी किसानों ने शीतगृहों से आलू नहीं निकाला।
- गैर प्रांतों में आलू की पैदावार कम हुई है। वहां भी अपने प्रदेश से आलू भेजा जा रहा है।
- बारिश से प्रदेश और देश के कई और हिस्सों में बाढ़ है। यातायात अवरुद्ध हो गया है। आलू फंसने के डर से भी निकासी नहीं हो रही है। मांग के मुताबिक आपूर्ति न होने से भाव चढ़े हैं।
- बारिश और बाढ़ से हरी सब्जियों की खेती को नुकसान पहुंचा है। इनके भाव बढ़े तो आलू की मांग बढ़ गई और दाम बढ़ते चले गए।

फैक्ट फाइल
जिले में आलू का रकवा 45500 हेक्टेयर
जिले में शीतगृह 107
शीतगृहों की भंडारण क्षमता - 1017918.96 मीट्रिक टन
कुल भंडारित आलू - 862991.69 मीट्रिक टन
अभी तक हुई कुल निकासी - 182552.74 मीट्रिक टन

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बाजार में आलू का थोक भाव
सामान्य आलू - 1000-1050 रुपये प्रति पैकेट
आलू 3797 - 1250 रुपये प्रति पैकेट
चिप्सोना - 1300 रुपये प्रति पैकेट
(एक पैकेट में 50 किलोग्राम आलू आता है।)
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शीतगृह स्वामी व एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष मनोज रस्तोगी भी मानते हैं कि इस समय आलू की निकासी सुस्त है। इसके पीछे वह बरसात, उमस भरी गर्मी बड़ी वजह है। उनका कहना है कि गर्मी के कारण किसान और व्यापारी शीतगृह से आलू निकालने से हिचक रहे हैं। आलू न बिकने पर सड़ जाने का भय बना रहता है। इस कारण निकासी कम हो रही है। वहीं जिले से बाहर की मंडियों में भी तेजी के चलते आलू की मांग कम होने से निकासी प्रभावित हो रही है।

आलू आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर वर्मा रिंकू बताते हैं कि इस समय आलू की लोडिंग बिहार, असम सिल्चर, पूर्वांचल में आजमगढ़, मुगलसराय, जौनपुर, सुल्तानपुर की मंडियों के लिए हो रही है। प्रतिदिन 50-60 ट्रक आलू निकाला जा रहा है। इसमें से 30-40 ट्रक आलू बाहर की मंडियों में भेजा जाता है। वहीं लगभग 20 ट्रक आलू की खपत स्थानीय मंडी में हो जाती है। बताया कि हरी सब्जियों के दामों में वृद्धि होने के कारण आलू के भाव में कुछ तेजी आई है।

जिला उद्यान अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि मक्का और मूंगफली की फसल अब अपने अंतिम दौर में है। इसके बाद किसान आलू पर ही ध्यान केंद्रित करेगा। अभी उमस भरी गर्मी बरसात और ट्रांसपोर्ट के कारण व्यापारी और किसान आलू की निकासी कम कर रहे हैं। डर है कि आलू न बिका तो सड़ जाएगा। सितंबर माह के अंतिम सप्ताह से आलू की बुवाई शुरू हो जाती है। शीतगृ़ह में रखे आलू का 30-35 फीसद आलू बुवाई में प्रयोग हो जाता है। नवरात्र आदि त्योहारों के होने से आलू की खपत भी बढ़ जाती है। शीतगृहों में खाने के लिए लगभग 35 प्रतिशत आलू ही रखा है। अगस्त माह के दूसरे पखवाड़े से आलू की शीतगृ़हों से निकासी तेज होने की संभावना है।
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