अगली विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों में टिकट को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। बसपा में दो प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कार्यकर्ता दो गुटों में बंट गए हैं। कांग्रेस में टिकट पाने की होड़ में अपनों के बीच जंग छिड़ी है।
भारतीय जनता पार्टी में भाई- भाई के विरुद्ध टिकट की दावेदारी ने संघर्ष को कांटे का बना दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी में भी जोर आजमाइश तो सभी सीटों पर हैं, लेकिन अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र पर पदाधिकारियों के बीच महाभारत के हालात हैं।
विधानसभा चुनाव में प्रत्याशिता को लेकर यहां छिड़ी जंग का सबसे ज्यादा असर बसपा में दिखाई दिया। बसपा में शहर क्षेत्र से महेंद्र कटियार का टिकट काटकर उमर खां को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद खेमेबंदी बढ़ गई है। कभी महेंद्र कटियार के लिए किसी भी हद तक जाने का दावा करने वाले बसपा के जिलाध्यक्ष सुभाष गौतम अब बीच का रास्ता निकालने नजर आ रहे हैं। वह कहते हैं कि टिकट काटना और देना बहनजी का अधिकार क्षेत्र है।
यदि कोई कार्यकर्ता नाराज है तो उसका अपना अधिकार है। कांग्रेस पार्टी में हर विधानसभा क्षेत्र से टिकट पाने के लिए प्रत्याशियों की एक लंबी फेहरिस्त है। भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक के बेटे कांग्रेस के प्रदेश सचिव कौशलेंद्र यादव दावेदारी कर रहे हैं तो इसी सीट पर दीप्ती कटियार भी लाइन में लगी हैं। अन्य सीटों पर भी पांच से छह नेता टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी में शहर क्षेत्र का मुकाबला रोचक है।
इस सीट पर पहले भी चुनाव लड़ चुके पूर्व मंत्री स्वर्गीय ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पुत्र मेजर सुनीलदत्त द्विवेदी दावेदारी कर रहे हैं। दूसरी तरफ इसी सीट पर ब्रह्मदत्त द्विवेदी के भाई डा. हरिदत्त द्विवेदी के बेटे प्रांशुदत्त द्विवेदी भी हाईकमान से संपर्क में हैं। यहां सगे चचाजात भाइयों में टिकट को लेकर द्वंद छिड़ा हुआ है।
सत्तासीन समाजवादी पार्टी में टिकट को लेकर मचा घमासान अब सड़क पर दिखने लगा है। अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में जहां पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह चुनाव लड़ने जा रहे हैं वहीं ब्लाक प्रमुख डा. सुबोध यादव ने भी प्रत्याशिता का दावा कर दिया है।