मोहम्मदाबाद। प्रधान पद के चुनाव की मतगणना हुए करीब एक सप्ताह का समय गुजर चुका है। अभी तक ब्लाक क्षेत्र की ग्राम सभाओं में ग्राम पंचायत सदस्य पदों पर विजयी हुए सदस्यों में से आधा सैकड़ा को प्रमाण पत्र वितरित नहीं किए गए हैं। यह विजय का प्रमाण पत्र लेने के लिए ब्लाक कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं।
अब प्रमाण पत्र जारी करने में खेल शुरू हो गया है। दो ग्राम पंचायत सदस्यों के स्थान पर उपविजेताओं के प्रमाण पत्र तैयार कर दिए गए। इसकी जानकारी होने पर सदस्यों ने समर्थकों के साथ ब्लाक कार्यालय पहुंच कर विरोध जताया। बीडीओ ने एआरओ से जानकारी कर दोनों प्रमाण पत्र निरस्त करा कर विजेताओं के नाम जारी करने का आश्वासन दिया है।
न्याय पंचायत एवं ग्राम सभा पखना के वार्ड संख्या 15 से नागेन्द्र ग्राम पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीते थे। इस वार्ड में दूसरे नंबर पर ममीना रहीं। वार्ड संख्या 13 से सोनी देवी विजयी हुई थीं। दूसरे स्थान पर राजेश्वरी देवी थीं। विजेताओं की सूची आयोग की वेबसाइट पर लोड कर दी गई। इसमें दोनों विजेताओं का नाम अंकित है।
दोनों प्रत्याशी मतगणना के बाद से प्रमाण पत्र लेने के लिए ब्लाक कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। इनको अभी तक विजय का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। रविवार को शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दोनोें विजयी प्रत्याशियों ने प्रमाण पत्र मांगे। कर्मचारी सत्य प्रकाश ने बताया कि उनके नाम से कोई प्रमाण पत्र नहीं है।
वार्ड संख्या 15 से ममीना और वार्ड 13 से राजेश्वरी देवी के नाम से प्रमाणपत्र बनाया गया है। यह सुनकर दोनों प्रत्याशी दंग रह गए। यह वापस गांव आए और सपा नेता सचिन यादव व समर्थकों को लेकर शाम के समय ब्लाक कार्यालय पहुंचे। इन्होंने बीडीओ अतुल कुमार त्रिवेदी को मामले की जानकारी देकर प्रमाण पत्रों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया। बीडीओ ने कर्मचारी को बुलाकर प्रमाण पत्र देखे और विभागीय अभिलेखों से मिलान किया तो पता चला की विजेताओं के स्थान पर उपविजेताओं के प्रमाण पत्र बनाए गए हैं।
इस संबंध में बीडीओ ने न्याय पंचायत के एआरओ राजीव कुमार से मोबाइल से वार्ता की। उन्होेंने गलती से उपविजेताओं के प्रमाण पत्र बनने की बात कही। बीडीओ ने दोनोें प्रत्याशियों से प्रमाण पत्र लेकर कहा कि इनका आरओ के माध्यम से निरस्त कराकर दूसरे तैयार किए जाएंगे। इसके बाद दोनों को बुलाकर प्रामण पत्र दिया जाएगा । ब्लाक क्षेत्र के आधा सैकड़ा ग्राम पंचायत सदस्यों को चुनावी मतगणना समाप्त होने के एक सप्ताह बाद भी प्रमाण पत्र नहीं दिए गए। इस कारण उनको ब्लाक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।