एक बार फिर 17 दिन बाद मंगलवार दोपहर करीब 12.35 बजे धरती डोल उठी तो लोगों
की रूह कांप गई। लोग भूकंप आया, भूकंप आया कहते हुए घरों और दफ्तरों से
बाहर की ओर दौड़ पड़े। करीब एक घंटे तक मोहल्लों और सरकारी कार्यालयों में
अफरातफरी मची रही। मोहल्ला गढ़ी कोहना में एक महिला कुर्सी से गिर पड़ी।
वहीं मोहल्ला राजीव गांधी नगर में एक युवक के घर में अलमारी पर रखी कांच की
बोतल जमीन पर गिरकर टूट गई।
कार्यालय से बाहर भागे कर्मचारी
करीब
17 दिन पहले आए भूकंप के भय से अभी लोग उबर भी नहीं सके थे कि मंगलवार को
फिर से भूकंप आ गया। टाउनहाल स्थित जिला नगरीय विकास अभिकरण कार्यालय
(डूडा) में दोपहर करीब 12.35 बजे विभागीय कामकाज निपटा रहे लिपिक नसीम अहमद
जावरी और शरद वाजपेयी ने भूकंप के झटके महसूस किए। लिपिक नसीम अहमद जावरी
ने बताया कि उन्हें लगा कि जमीन हिल रही है। भूकंप के झटकों से कार्यालय के
कर्मचारी बाहर निकल आए। वहीं नगर पालिका कार्यालय में बैठे कर्मचारी भी
अनहोनी के भय से कार्यालय से निकलकर पार्क में आ गए।
कई मोहल्लों में अफरातफरी
भूकंप
के झटकों के चलते मोहल्ला बजरिया, बजरिया निहालचंद्र, बागकूंचा, सेनापति
और गढ़ी नवाब न्यामत खां आदि मोहल्लों में अफरातफरी रही। इसके अलावा रेलवे
रोड, नेहरू रोड और घुमना बाजार समेत अन्य बाजारों में दुकानदार भी सड़क पर आ
गए। कांशीराम कालोनी हैवतपुर गढ़िया में भी लोग घरों से निकलकर सड़क पर आ
गए। करीब एक घंटे तक यह लोग डर से घर के अंदर नहीं गए। भूकंप को लेकर शहरी
काफी सहमे रहे। स्कूलों से भी छात्र-छात्राएं बाहर निकल आए। दहशत के कारण
काफी देर तक बाहर ही रहे।
टेलीविजन से ली पल-पल की जानकारी
टेलीविजन
पर लोग भूकंप का हाल जानते रहे। मोहल्ला गढ़ी कोहना की रंजना पांडेय ने
बताया कि वह कुर्सी पर बैठकर टेलीविजन देख रही थीं कि इसी दौरान अचानक
कुर्सी हिली और वह गिर पड़ीं। राजीव गांधी नगर के सोनू तिवारी ने बताया कि
वह घर पर थे, तभी एकदम लगा कि मानो जमीन हिल गई है। इसी के साथ अलमारी पर
रखी कांच की बोतल नीचे गिरकर टूट गई। धरती हिलने के एहसास के साथ ही वह
परिजनों के साथ घर से बाहर निकल आए।
कांशीराम कालोनी के बाशिंदे हैं सहमे
कांशीराम कालोनी में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा सहमे हुए हैं। मंगलवार को
अमर उजाला से बातचीत में यहां के बाशिंदों का कहना था कि उनके लिए बनवाई गई
कालोनी में घटिया निर्माण सामग्री का प्रयोग भी किया गया है। इसलिए डर बना
रहता है कि कहीं भवन भूकंप से गिर न जाए। वर्ष 2008 में बसपा शासनकाल
में गरीबों के रहने के लिए टाउनहाल, बधौआ
और हैवतपुर गढ़िया में कांशीराम
शहरी आवासीय योजना के तहत करीब 1500 आवास बनवाए गए थे। सबसे ज्यादा 1296
आवास कांशीराम कालोनी हैवतपुर गढ़िया में बने हैं। मंगलवार को आए भूकंप के
झटकों से कांशीराम कालोनी के रहने वाले लोग काफी सहमे हुए हैं। कांशीराम
कालोनी हैवतपुर गढ़िया के रहने वाले संजू कहते हैं कि कालोनी में घटिया
निर्माण
सामग्री का प्रयोग किया गया है। इसलिए डर रहता है कि कहीं भूकंप से
भवन गिर न पड़े। टाउनहाल पर बनी कालोनी की रहने वाली ममता देवी कहती हैं
कि मकान का प्लास्टर आदि गिरने लगा है। छतों पर दरारें पहले से ही हैं। ऐसे
में यह डर रहता है कि भूकंप के झटकों से चार मंजिला भवन गिर न पड़े।
महावीर, मनोरमा देवी और राकेश कहते हैं कि कालोनी की
दीवारें कमजोर होने से
भूकंप तो क्या आंधी में भी भय लगता है। बिल्लू, मधु और छुटकन्ने आदि का
कहना है कि नेपाल में जब भूकंप के झटकों से बड़ी-बड़ी इमारतें ढह गईं तो यह
डर रहता है कि कहीं घटिया बनी कांशीराम कालोनी भी न ढह जाएं। शमसाबाद
प्रतिनिधि के अनुसार दोपहर में भूकंप के झटके आने पर आर्यावर्त ग्रामीण
बैंक के कर्मचारी कार्यालय से
निकलकर सड़क पर आ गए। प्रबंधक उदयचंद्र ने
बताया कि भूकंप के झटके से कुर्सी गिर पड़ी। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य
केंद्र में भर्ती मरीज, तीमारदार और स्वास्थ्यकर्मी भी बाहर निकल आए।