कमालगंज। हरियाली बढ़ेगी तो वातावरण शुद्ध होगा और भरपूर ऑक्सीजन मिलेगी। बीमारी से भी बचाव होगा। इसी सोच से छह साल पहले वृंदावन के संत सेवानंद सरस्वती ने क्षेत्र के टाडाबरहामपुर गांव स्थित आश्रम में धरती का हरियाली से श्रृंगार करने का संकल्प लिया था। कुछ दिनों में ही चार बीघा क्षेत्र में स्थित आश्रम में हरियाली इठालने लगी।
गांव के आश्रम में संत सेवानंद सरस्वती साल 2016 में आए थे। चार बीघे के आश्रम में देखरेख के लिए उस समय कोई व्यक्ति तनहीं था। आश्रम में महादेव के मंदिर में साधना के लिए वह कुछ दिन के लिए रुक गए। जहां उनके मन में भाव आया कि प्रकृति सेवा ही प्रभु सेवा है। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण संरक्षण की ठान ली। सबसे पहले यहां सबमर्सिबल लगवाया।
फिर नर्सरी से पौधे मंगवाए। साथ ही फलदार पेड़-पौधे जैसे आम, अमरूद, चीकू, लीची, आंवला, आडू आदि लगाए। साथ ही फूल वाले पौधे जैसे गुलाब, चमेली, हरश्रृंगार, बेला, गुड़हल, चांदनी, डहिलिया से पूरा आश्रम महक उठा। इस वक्त यहां आसपास के गांवों से भी तमाम लोग प्रकृति का सानिध्य पाने के लिए आते हैं।
आश्रम में अश्वगंधा, आंवला, अर्जुन, मिर्ची, गुड़हल, मीठा नीम, महुआ, बेल, बालमखीरा, सुदर्शन, गुलाब, तुलसी, गुर्च सहित कई औषधीय पौधे लगे हैं।
संत सेवानंद सरस्वती ने बताया कि कोरोना महामारी एक सबक है। जीवन को बचाना है तो प्रकृति, पर्यावरण का संरक्षण करना जरूरी है। भूजल संरक्षित करना होगा।