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ऑक्सीजन की कमी से लोगों को याद आए पौधे

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कायमगंज। कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी से जूझने के बाद लोगों का पौधरोपण की ओर रुझान बढ़ा है। गांव बरझाला समेत आसपास गांवों में नर्सरी वालों के यहां पौधों की डिमांड बढ़ गई है। महानगरों से भी इन पौधों की मांग की जा रही है। इन पौधों में पीपल, बरगद, सहजन तथा स्नेक प्लांट के सांसेवियरिया शामिल हैं।
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कायमगंज क्षेत्र के बरझाला, पपड़ी, मीरपुर, अताईपुर, हंसा गौराईपुर, चिलसरी आदि गांव देश में नर्सरी के लिए मशहूर हैं। बरझाला के अभय नर्सरी के नीरज गंगवार, मेराज, गुड्डू आदि ने बताया उनके यहां के अलावा अन्य गांवों में अधिक ऑक्सीजन देने वाले पौधे तैयार किए जा रहे हैं। यहां की नर्सरी जयपुर, दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता, हरियाणा, पंजाब आदि राज्यों में सप्लाई होती है। सभी जगह से मांग आई है। इसमें घरों में रखने के लिए सांसेवियरिया, मनी प्लांट, एरिका पॉम की मांग अधिक है। इसके अलावा बड़े पौधे नीम, पीपल, बरगद की भी मांग हो रही है। अधिकांश नर्सरी वाले इन पौधों को तैयार करा रहे हैं। पिछले वर्ष लॉकडाउन में हर कारोबार की तरह नर्सरी उद्योग पर भी असर पड़ा था, लेकिन इस साल कोरोना ने लोगों की सांसें कम कर दीं तो लोगों को पेड़ पौधों की याद आने लगे हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल अधिक ऑक्सीजन देने वाले पेड़ पौधों की डिमांड बढ़ गई है।
कोरोना संक्रमण के दिनों में ऑक्सीजन की किल्लत होने पर वास्तव में लोगों को पेड़ पौधों की कीमत का अहसास हुआ है। दो दिन पहले राज्य महिला आयोग की सदस्य डॉ. मिथलेश अग्रवाल ने अपने सीपी स्कूल के प्रांगण में खुद ही जाकर पौधरोपण किया। हालांकि बारिश के दिनों में वे हमेशा ही पेड़ पौधे लगाने का शौक रखती थीं, लेकिन इस बार ऑक्सीजन की किल्लत को देखते हुए उन्होंने पहले ही पौधरोपण करना शुरू कर दिया है। उन्होंने अधिक ऑक्सीजन देने वाले पीपल, नीम आदि का पौधरोपण किया।
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सीएचसी के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. अमरेश कुमार ने बताया कि घरों में सहजन, सांसेवियरिया, मनी प्लांट, एरिका पॉम आदि पौधे ऑक्सीजन के लिए विशेष लाभदायक हैं। इसके अलावा पीपल, नीम, बरगद के पौधे सबसे अधिक ऑक्सीजन देने वाले हैं। कोरोना काल में आक्सीजन की कमी होने पर लोगों को पेड़ पौधों की कद्र आई है। सांसों के लिए पौधरोपण जरूरी है।
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