फोटो-29 कमालगंज मंडी में आलू न बिकने से मायूस खड़े किसान। संवाद
कमालगंज। किसानों के लिए शनिवार का दिन बहुत अधिक मायूसी भरा रहा। कमालगंज मंडी में आया करीब 20 हजार पैकेट में से 17 हजार पैकेट आलू नहीं बिका। बिक्री न होने से किसान अपना आलू आढ़तों पर ही छोड़ गए। बाहर की मंडियों में कई जगह से आलू पहुंचने से जिले की मंडियों में मंदी छाई है। ट्रकों की कमी व भाड़ा बढ़ने की वजह भी आग में घी का काम कर रही है।
सवा महीने पहले शुरू हुई कमालगंज की आलू मंडी में शनिवार को 20 हजार पैकेट आलू आया। इसमें से शुक्रवार की तुलना में 80 रुपये क्विंटल गिरावट के साथ करीब 3 हजार पैकेट ही बिक पाया। 17 हजार पैकेट के खरीदार किसी भी भाव किसानों को नहीं मिले। इससे किसान आढ़तों पर ही आलू छोड़ गए।
आढ़ती संघ के पूर्व अध्यक्ष संजय कमल का कहना है कि अभी तक बनारस में 600 रुपये क्विंटल आलू बिक रहा है। शनिवार को बनारस के व्यापारियों ने अच्छे माल का भाव 500 रुपये क्विंटल बताया। बनारस का भाड़ा 120 रुपये क्विंटल था। ट्रकों की कमी से भाड़ा बढ़कर 150 रुपये क्विंटल हो गया। यहां 200 रुपये पैकेट यानी 400 रुपये क्विंटल ही आलू किसानों से खरीदा जाए तो भी भाड़ा खर्चा मिलाकर बनारस पहुंचने पर 550 रुपये क्विंटल लागत आएगी। जबकि वहां के व्यापारी 500 रुपये से ज्यादा खरीदने से मना कर रहे हैं।
इस्लाम निराला ने कहा कि एक दिन में ही 80 रुपये क्विंटल से ज्यादा की मंदी है। इस मंदी के भाव पर भी लिवाली नहीं है। आढ़तियों ने बताया कि किसान जो अपना माल मंडी में छोड़ गए हैं, उसे जब कोई व्यापारी मांगेगा तो किसानों को फोन से सूचना दे देंगे। अभी तक फर्रुखाबाद से करीब आधा दर्जन व्यापारी कमालगंज मंडी में माल खरीदने आ रहे थे। उनमें से एक व्यापारी ने ही खरीद की।