अमृतपुर/शमसाबाद। गंगा व रामगंगा में आई बाढ़ से घरों में पानी भरने से अब ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की तलाश को पलायन करने लगे है। जिनकी झोपड़ी में पानी भर गया है, वह गृहस्थी का सामान लेकर गांव छोड़ सड़क किनारे पॉलिथीन तार कर ठिकाना बना लिया है। पक्के मकान वाले ग्रामीणों ने छतों को रहने का ठिकाना बनाया है। बाढ़ के पानी से ग्रामीणों के सामने खुद का पेट भरने की समस्या है हीं, अब पशुओं का पेट भरना उनके लिए चुनौती बन गई है। पानी भरे होने से भूसा भींग गया है। घास पानी में डूबी हुई है। पशुओं के लिए चारा की व्यवस्था करना ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनने लगी है।
नरौरा बांध से गंगा में लगातार अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से जलस्तर कम नहीं हो रहा है। तीन दिन से गंगा का जलस्तर 136.90 मीटर पर बह रहा है। रविवार को 1 लाख 69 लाख 117 क्यूसेक पानी और छोड़ा गया। रामगंगा के जलस्तर में दस सेंटीमीटर गिरावट आने से 135.30 से जलस्तर 135.20 मीटर पर आग गया है। गंगा में आई बाढ़ से तटवर्ती गांवों में पानी भरा हुआ है। गांव हरसिंहपुर कायस्थ में ग्रामीणों के आवागमन को दो नाव
लगी है। यह ग्रामीणों के लिए कम है। नाव के अभाव में गांव में खासी, बुखार व खुजली से ग्रसित ग्रामीण दवा लेने जाने को रास्ता पार नहीं कर पाते है। स्वास्थ्य टीम भी इन गांवों में अभी तक नहीं गई है। इससे गांव के लोग काफी परेशान है। अब गांव के लोगों ने गांव में जिन लोगों के पास नाव है, उनसे मांग कर रास्ते में भरे पानी को पार कर रहे है। इस गांव में हर घर में पानी भरा है। जिनके पक्के मकान है वह छत पर रहकर गुजारा कर रहे है। जिनके
कच्चे मकान है और गिरने का डर है। वह घर छोड़कर गृहस्थी का सामान लेकर सड़क किनारे ठिकाना बनाकर रहने लगे है। गांव सुंदरपुर जाने वाले मार्ग पर पानी भरा हुआ है। इससे गांव के लोगों को आवागमन करने में दिक्कत उठानी पड़ रही है। जिले में बाढ़ से करीब 40 गांव प्रभावित है। इन गांव के लोगों को खाने को राहत पैकेट भी नसीब नहीं हो रहे है। कुछ गांवों में राहत पैकेट बंटवाए जा रहे है। शमसाबाद प्रतिनिधि के अनुसार बाढ़
प्रभावित गांव समौचीपुर में कच्चे मकान व झोपड़ी में रहने वाले अतीक, सफीक, वीर मोहम्मद, इमली हसन समेत अन्य लोगों ने अपने आशियाने छोड़ दिए है। वह अब शाहजहांपुर- शमसाबाद मार्ग पर ढाईघाट पुल के पास सड़क किनारे आकर पॉलिथिन तान कर रहेन लगे है। ग्रामीणों को कहना है कि उनके रहने का गांव में अब कोई ठिकाना नहीं है। इस कारण वह सड़क किनारे आकर रहने लगे है।
शमसाबाद। बाढ़ प्रभावित गांव गुटैटी दक्षिण में पानी भरा हुआ है। यहीं पर पौध शाला है। जिसमें जाने के रास्ते पर काफी पानी भरा है। इसमें घुस कर जाने से हादसा होने का डर रहता है। वन विभाग के करीब 30 कर्मचारी पौधशाला में रहते है। इनके आवागमन को अब लकड़ी की बल्लियों के माध्यम से अस्थाई पुल बनाया जा रहा है। जिससे पौधशाला के कर्मचारी आवागमन करेंगे।
शमसाबाद। बाढ़ प्रभावित गांव बांस खेड़ा में रविवार को भाजपा विधायक अमर सिंह ने रविवार को पूर्व चेयरमैन विजय गुप्ता, तहसीलदार व लेखपाल के साथ बाढ़ प्रभावित गांव बांस खेड़ा पहुंचे। यहां करीब दो सौ ग्रामीणों को राहत सामग्री बांटी। स्वास्थ्य टीम ने कटरी तौफीक में पहुंच कर करीब तीस लोगों को बुखार, खासी व खुजली की दवा बांटी।