परिषदीय स्कूलों में रसाईघर बने हैं लेकिन इनका उपयोग नहीं हो रहा है।
अधिकांश स्कूलों में रसोईघरों की बजाय खुले में नौनिहालों के लिए खाना
बनवाया जाता है। खाना बनाने में प्रयोग होने वाले मसाले खुले प्रयोग होते
है। अमर उजाला की पड़ताल करती रिपोर्ट-
खुले में बनता मिडडे मील
पूर्व
माध्यमिक विद्यालय कमालगंज में रसाईघर बना हुआ है लेकिन बच्चों के लिए
खाना बाहर चूल्हे पर बनवाया जाता है। प्रधानाध्यापिका पुष्पलता राठौर ने
बताया कि रसोईघर में जगह का अभाव है। गैस कनेक्शन नहीं है। चूल्हे के कारण
बाहर बनवाना पड़ता है।
पेड़ के नीचे बनता खाना
पूर्व माध्यमिक
मोहनपुर में पेड़ के नीचे खुले में एमडीएम बनाया जाता है। प्रधानाध्यापिका
रानी देवी ने बताया कि रसोईघर नहीं बना है। इसलिए मजबूरन खुले में चूल्हे
पर बच्चों के लिए खाना बनवाना पड़ता है।
बाहर ही बच्चों का भोजन
प्राथमिक
विद्यालय मोहनपुर में रसोईघर है लेकिन खाना बाहर बनवाया जाता है।
प्रधानाध्यापिका अनीता देवी का कहना है कि जगह कम होने के चलते बाहर भोजन
बनता है। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि खुले मसालों को
ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट में भरकर इस्तेमाल किया जाता है।
राशन रखा जाता रसोई में
प्राथमिक
विद्यालय आसमपुर में रसाईघर बना है। इसका उपयोग सामग्री रखने के लिए किया
जाता है। खाना खुले में गैस चूल्हे पर बनवाया जाता है। मंगलवार को
दाल-चावल बनाए जा रहे थे। यहां रसोईघर में ब्रांडेंड कंपनियों के मसाले रखे
थे। सहायक अध्यापक सत्यदेव वर्मा ने बताया कि प्रधान मिडडे मील बनवाते
हैं।
यहां भी खुले में रसोई
प्राथमिक विद्यालय ताजपुर में खुले
मैदान में चूल्हे पर खाना बनता है। यहां गैस सिलेंडर व चूल्हा है लेकिन
रसोइया गैस चूल्हा पर मिडडे मील नहीं बनाती है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय
ताजपुर में रसोईघर में भोजन बनता है। प्रधानाध्यापक राजेंद्र सिंह बताया कि
गैसचूल्हा व सिलेंडर नहीं है। भोजन रसोईघर में बनाया जाता है।