फर्रुखाबाद। जमीन की रंजिश में 28 वर्ष पहले चचेरे भाइयों की गोली मारकर हत्या के मामले में कोर्ट ने एक को दोषी करार दिया है।
मामले के दो आरोपी अभी भी फरार चल रहे हैं। एक आरोपी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
नवाबगंज थाना क्षेत्र के गांव दनियापुर हीरामन निवासी रामसेवक की गांव के ही पदम सिंह से जमीन की रंजिश चल रही थी। 14 सितंबर 1994 को रामसेवक रात 12 बजे घर के बाहर चारपाई पर लेटे थे। दूसरी चारपाई पर पुत्र सामोद सो रहा था।
तभी पदम सिंह, अतर सिंह, अजय पाल सिंह, राजकुमार दरवाजे के बाहर पहुंचे। इन लोगों ने रामसेवक को गोली मार दी और सामोद के सिर पर किसी से प्रहार कर उसको घायल कर दिया।
गोली की आवाज सुनकर भाई मान सिंह व चचेरे भाई मकरंद ने आरोपियों का पीछा किया।
मकरंद ने अजयपाल सिंह को पकड़ कर उसका तमंचा छीन लिया। तभी पदम सिंह ने मकरंद को भी गोली मार दी। रामसेवक की मौके पर ही मौत हो गई। मकरंद को इलाज के लिए ले जा रहे रहे थे उसने रास्ते में दम तोड़ दिया।
मान सिंह ने भाई रामसेवक व चचेरे भाई की हत्या में 15 सितंबर 1994 को पदम सिंह, अतर सिंह, अजय पाल सिंह, राजकुमार के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने 23 दिसंबर 1994 को चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर पदम सिंह को गिरफ्तार किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान पदम सिंह की मौत हो गई। अजय पाल, अतर सिंह, राजकुमार के खिलाफ कोर्ट से वारंट जारी हुए, लेकिन वह पकड़ में नहीं आए। वर्ष 2020 में अजय पाल ने अवैध शस्त्र के मुकदमे में कोर्ट मेें समर्पण कर दिया।
इसके बाद दोहरे हत्याकांड के मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ। फरार अतर सिंह व राजकुमार की फाइल को अलग कर दिया गया। गवाहों व साक्ष्यों के आधार पर एडीजे राकेश कुमार सिंह ने आरोपी अजय पाल को दोहरे हत्याकांड में दोषी करार दिया।
सजा के लिए 10 नवंबर की तारीख लगाई है। मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता हरीनाथ सिंह, राजीव भगोलीवाल, अखिलेश कुमार, संजीव कुमार पाल ने दलीलें दीं।