भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने ग्राम सभा बहोरा में खुली बैठक बुलाने में अनदेखी किए जाने का आरोप लगाकर बुधवार को बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी को कलक्ट्रेट स्थित कार्यालय में घेर लिया। बाहर घूम रहे कर्मचारियों को न्यायालय कक्ष के अंदर कर अधिकारी कक्ष और न्यायालय कक्ष दोनों के गेट पर ताला मारकर बंधक बना लिया।
ब आंधे घंटे तक किसान यूनियन के नेता प्रदर्शन करते रहे। करीब आधे घंटे बाद ताला खुलने पर अधिकारी और कर्मचारियों ने राहत की सांस ली।
भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने छह सूत्री मांगों को लेकर धरना दिया। वह सभी लोग बंदोबस्त चकबंदी अधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन करते हुए पहुंचे और अधिकारी के कक्ष में घुस गए। वहां पहुंचते ही यूनियन नेताओं ने ग्राम सभा बहोरा में चकबंदी निरस्त कराने को खुली बैठक न बुलाने का आरोप लगाकर हंगामा करना शुरू कर दिया।
किसान यूनियन नेताओं ने उनको कुर्सी पर बैठा दिया और जमकर खरीखोटी सुनाईं। इसके बाद कार्यालय से बाहर निकल कर गेट पर ताला मार दिया। किसान यूनियन नेता एसओसी न्यायालय कक्ष की ओर आए और गेट को बंद करने लगे। इस दौरान कर्मचारियों से नोकझोंक होनी शुरू हो गई। धक्कामुक्की कर किसान यूनियन नेताओं ने न्यायालय कक्ष के गेट पर भी ताला मार दिया।
इसके बाद वहां करीब आंधे घंटे तक प्रदर्शन किया। विभागीय कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों के समझाने पर किसान नेताओं ने ताले की चाबी दी। तब न्यायालय और अधिकारी के कक्ष गेट पर पड़ा ताला खुल सका। किसान यूनियन ने दिए ज्ञापन में कहा है कि ग्राम सभा बहोरा में किसान चकबंदी नहीं चाहते हैं।
इसके लिए खुली बैठक बुलाने की कई बार मांग की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इसको लेकर जहानगंज थाना क्षेत्र में काननूगो ने किसान यूनियन नेताओं के खिलाफ जो रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वह समाप्त की जाए। ग्राम सभा बहोरा, ग्राम सभा मुबारकपुर तथा मोहम्मदाबाद ब्लाक की ग्राम सभा मदनपुर समेत किसानों की अन्य समस्याओं का समाधान किए जाने की मांग की।
इस दौरान रामसेवक सक्सेना, सुभाकांत मिश्रा, हरिओम अग्निहोत्री समेत कई किसान और महिलाएं मौजूद रहे। वहीं बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी रामकिशोर वर्मा ने बताया कि 16 दिसंबर को बहोरा में खुली बैठक बुलाई गई है। इसमें पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने को एसपी को पत्र भेजा जा चुका है। संगठन के नेता जहानगंज थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर को वापस लिए जाने का दबाव बना रहे हैं। इस कारण इस तरह के कार्य कर रहे हैं।