निषादराज जयंती पर कश्यप निषाद शोभायात्रा समिति ने हवन-पूजन के बाद विशाल
शोभायात्रा निकाली । शोभायात्रा में समाज के लोगों के अलावा महिलाएं भी
शामिल हुईं। कश्यप निषाद शोभायात्रा समिति ने निषादराज जयंती पर नगर में
शोभायात्रा निकाली। शोभायात्रा बड़ी देवी मंदिर परिसर से शुरू हुई।
शोभायात्रा से पहले समाज के लोगों ने हवन में आहुतियां दीं। इसमें बैंड
बाजे भी शामिल रहे। महर्षि कश्यप और निषाद राज की झांकी आकर्षक रही।
शोभायात्रा नगर के मुख्य मार्ग गल्ला मंडी,
मुख्य चौराहा, लोहाई बाजार,
श्यामागेट, बजरिया, तहसीलर रोड, पुल गालिब, छपट्टी, चिलांका, पटवनगली,
पृथ्वीदरवाजा, ट्रांसपोर्ट चौराहा, जटवारा होते हुई बड़ी देवी मंदिर
पहुंचकर संपन्न हो गई। यात्रा में प्रमुख रूप से नरेश बाथम, रामप्रकाश
बाथम, नरेश बाथम, भैयालाल कश्यप, राजकुमार कश्यप, बाबूराम बाथम, खुशीराम
बाथम, जीसुखलाल, रमेश चंद्र, मोहनलाल, रामबाबू, डा. शिवकुमार बाथम, अशोक
कश्यप, सभासद शालिनी बाथम, श्यामादेवी कश्यप, रीना कश्यप आदि शामिल थे।
उधर,
जयंती पर विश्व बंधु परिषद ने गोष्ठी का आयोजन किया। गोष्ठी में प्रोफेसर
रामबाबू मिश्र ने कहा कि निषाद राज की सजातीय स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म व
संस्कृति के प्रति निष्ठा बेजोड़ थी। वह श्रीराम के प्रिय सखा और गुरु
वशिष्ठ के स्नेह पात्र थे। उनका जीवन सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
वीएस तिवारी ने कहा कि निषादराज के स्मरण से राष्ट्रभाव जगता है।
वह मत्स्य
जीवी वनवासियों के लोकप्रिय राजा थे। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में
जातिवाद और मजहब के नाम पर उन्माद फैलाने वालों को निषाद राज से सीख लेनी
चाहिए। आचार्य रामकृष्ण त्रिवेदी ने कहा कि निषादराज को श्रीराम का अनन्य
भक्त कहा जाना कोई अतिश्योक्ति नहीं है। पवन बाथम ने कहा कि परंपरा का पालन
करते हुए भी प्रगति की जा सकती है। गोष्ठी में हंसा मिश्रा, शिवकुमार
दुबे, विनय यादव आदि ने भी विचार व्यक्त किए।