फजिले में टीकाकरण से छूटे नवजातों और गर्भवती महिलाओं के लिए एनआरएचएम की
ओर से मिशन इंद्रधनुष शुरू किया गया है। इसके तहत कैंप कर एनएनएम और आशाएं
बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण करेंगी। सीएमओ डा. राकेश कुमार ने
बताया कि यह कार्यक्रम एक सप्ताह तक चलेगा।
सीएमओ कार्यालय में मीडिया
से बात करते हुए सीएमओ डा. राकेश कुमार ने कहा कि नवजात बच्चों को
बीमारियों से लड़ने के लिए एनआरएचएम ने रक्षा कवच के तौर पर मिशन इंद्रधनुष
शुरू किया है। इसमें जिले में टीकाकरण से वंचित नवजातों व गर्भवती
महिलाओं का टीकाकरण किया जाएगा। बताया कि देश में 201 जिलों में यह
कार्यक्रम चल रहा है।
उत्तरप्रदेश के 44 जिलों को इसमें शामिल किया गया है।
यह कार्यक्रम 7 से 14 अप्रैल तक चलाया जाएगा। यह चार चरणों में चलेगा।
उन्होंने बताया कि वह उपकेंद्र जिनमें एएनएम नहीं हैं या फिर दो तीन महीनों
से एएनएम नहीं जा रहीं वहां कैंप लगा कर टीकाकरण किया जाएगा। इस मिशन का
नाम इंद्रधनुष इसलिए रखा गया कि उसमें सात रंग होते है। इसमें बच्चों
को
सात बीमारियों से बचाने के लिए वैक्सीन लगाई जाएंगी। इसमें टीबी, गलाघोंटू,
टिटनेस, काली खांसी, खसरा, हेपेटाइटिस बी के साथ ही पोलियो से बचाव की दवा
दी जाएगी। जिले में 890 इलाकों में यह टीकाकारण किया जाएगा। इस दौरान
एसीएमओ डाक्टर राजवीर सिंह और डब्लूएचओ के रिजनल टीम लीडर डाक्टर अभिषेक
जैन मौजूद रहे।
इंद्रधनुष का मकसद
* मिशन में नवजात से लेकर 2 वर्ष के बच्चों और गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण होगा।
* सभी अप्रतिरक्षित एवं आंशिक प्रतिरक्षित बच्चों का टीकाकरण कराया जाएगा।
इन इलाकों में निकलेगा इंद्रधनुष
* ऐसे उपकेंद्र जहां एएनएम की नियुक्ति नहीं है।
* वह क्षेत्र जहां लगातार 3 महीने से एएनएम के छुट्टी पर या किसी और वजह से टीकाकरण नहीं हुआ है।
* पल्स पोलियो अभियान में चिंह्नित हाई रिस्क क्षेत्र जैसे शहरी मलिन क्षेत्र एवं बाहर से आए परिवार वाला क्षेत्र
* घुमंतू परिवार वाला क्षेत्र।
र्* इंट भट्टा पर काम करने वाले परिवार
* वह परिवार जहां लंबे समय से निर्माण हो रहा है।