धार्मिक बनने के लिए मन को शुद्ध करने की आवश्यकता है। मन तभी शुद्ध होगा, जब उसे परीक्षित कर लेंगे। हम अपने अंदर के गलत विचारों को नष्ट कर बोधित्व को प्राप्त कर सकते हैं। ये बातें बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने धम्म प्रवचन के दौरान कही।
वाईबीएस सेंटर राजघाट मैनपुरी में चल रहे धम्म प्रवचन समारोह के दूसरे दिन मंगलवार को बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा ने कहा कि क्रोध को नष्ट करने के लिए धैर्य की आवश्यकता होती है। परीक्षित करने से स्वयं के साथ ही दूसरों का भी कल्याण होता है। मनुष्य अपने मन व चित्त को परिशुद्ध कर ईर्ष्या, बैर और क्रोध को निकाल दें। चित्त को परिशुद्ध करते समय प्रज्ञा की जरूरत होती है। सुख की प्राप्ति के लिए मन को शुद्ध करना जरूरी है। मन के कर्म ही मनुष्य को जीवन में आगे और पीछे ले जाते हैं।
दलाई लामा ने कहा कि पाली परंपरा के अनुसार, ध्यान-साधना से मन को परिशुद्ध कर सकते हैं। अज्ञानता काटने के लिए प्रज्ञारूपी तलवार जरूरी है। आप चाहें किसी भी धर्म के लोग हों लेकिन मन का शुद्धीकरण आवश्यक है। क्लेश को खत्म करने के लिए मेहनत की जरूरत है। अच्छे कर्म से ही मानव जीवन मिलता है।
दलाई लामा ने कहा कि बुद्धत्व को प्राप्त करने के लिए दस अध्याय (ग्रंथ) और पांच मार्ग हैं और बुद्धत्व तभी प्राप्त होगा, जब आप चिंतन व मनन करेंगे। भगवान बुद्ध ने भी बोधचित्त को ही कल्याण माना है। परहित की भावना से ही सुख-समृद्धि आएगी।
दलाई लामा के प्रवचनों का हिंदी में अनुवाद कैलाशचंद्र शाक्य ने किया। प्रवचन समापन के बाद डॉ. नवल किशोर शाक्य ने आए हुए लोगों को धन्यवाद दिया। यूथ बुद्धिष्ट सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेशचंद्र बौद्ध, कैप्टन प्रभात शाक्य, पूर्व मंत्री आलोक शाक्य, संजय सोमवंशी और सुब्रत शाक्य आदि रहे।