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Farrukhabad News: नमाजियों ने पढ़ी नमाज, मांगी मुल्क में अमन की दुआ

Sat, 07 Jun 2025 11:31 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फर्रूखाबाद
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पुरानी ईदगाह में नमाज अदा करते अकीदतमंद। - फोटो : पुरानी ईदगाह में नमाज अदा करते अकीदतमंद।
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फर्रुखाबाद। अल्लाह के प्रति त्याग और समर्पण का पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) जिले भर में मनाया गया। मस्जिदों और ईदगाहों में कड़ी सुरक्षा में नमाज हुई। जामा मस्जिद में अमन के साथ वक्फ बोर्ड कानून पर जीत की दुआ मांगी गई। नमाजियों के लिए शर्बत की सबीलें लगाई गईं। दोपहर बाद तक कुर्बानी का दौर चलता रहा।
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शुक्रवार सुबह से ही घुमना स्थित जामा मस्जिद, नई और पुरानी ईदगाह समेत सभी मस्जिदों में भारी संख्या में नमाजी पहुंचे। जामा मस्जिद में शाही इमाम मुफ्ती मोअज्जम अली ने अल्लाह से दुआ मांगी कि वक्फ बोर्ड बिल का मसला हमारे हक में आए। उन्होंने गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।
बीबीगंज स्थित नई ईदगाह में बेशुमार भीड़ के चलते बाहर खाली जगह में नमाज पढ़ी गई। जिसमें देश में अमन और शांति की दुआ मांगी गई। इसके अलावा अर्रापहाड़पुर स्थित पुरानी ईदगाह में भी नमाजियों की खासी भीड़ रही। बीबीगंज पुलिस चौकी में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी, पुलिस अधीक्षक आरती सिंह, एडीएम अरुण कुमार, एएसपी डॉ. संजय सिंह आदि रहे।
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सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार बंसल, सीओ सिटी ऐश्वर्या उपाध्याय ने पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रखी। उन्होंने बताया कि सभी ने त्योहार शांति व सद्भाव से मनाया। मिश्रित आबादी में पुलिस ने ड्रोन कैमरों से नजर बनाए रखी।
फतेहगढ़ ईदगाह में मौलाना राशिद ने नमाज अदा कराई। उन्होंने मुल्क की तरक्की और हिफाजत की दुआ की। इस्लाम में कुर्बानी की अहमियत बताई। ईदगाह कमेटी के सदर रियाज अहमद फारूकी व सचिव अफजल हुसैन का इंतकाल होने पर श्रद्धांजलि दी गई। इसमें कमेटी के सचिव मसरूर अहमद के अलावा सैयद रिजवान अली, नसर खालिक, नवाब सिद्दीकी, अनवर जमाल, शकील खान, रहमत अली, नौशाद हुसैन आदि रहे।
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नमाजियों को पिलाई कोल्डड्रिंक व शर्बत
फर्रुखाबाद। ऑल इंडिया पसमांदा समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. शाकिर अली मंसूरी, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष असलम कुरैशी की देखरेख में पुरानी व नई ईदगाह में नमाजियों के लिए शरबत, ठंडा पानी, कोल्डड्रिंक की व्यवस्था की गई। उन्होंने कहा कि गंगा दशहरा पर भी उन्होंने शर्बत व शीतल जल पिलवाया था। यह काम गंगा जमुनी तहजीब को जीवित रखने के लिए किया जा रहा है। इसमें अदनान शाकिर, इदरीश सिद्दीकी, असलम कुरैशी, अल्तमश कुरैशी आदि का सहयोग रहा। (संवाद)
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