सड़क के किनारे मौरंग व गिट्टी के स्टाकि स्टों की दबंगई कायम है। इन्होंने
खनन महकमे में पंजीयन नहीं कराया है। दूसरा यह सड़क के किनारे अतिक्रमण
किए हैं। रजिस्ट्रेशन कराने के नोटिस के रिमाइंडरों को इन्होंने ठेंगा दिखा
दिया। ऐसे में स्टाकिस्टों के यहां मौरंग, गिट्टी के जब्तीकरण क ी
कार्रवाई होना चाहिए। लेकिन साहबों की मेहरबानी से यह मौज काट रहे हैं।
सड़क के किनारे मौरंग गिट्टी के ढेर हादसों को सबसे बड़ी वजह भी बने हैं।
शहर
में मौरंग व गिट्टी बेचने वालों ने खनन महकमे में रजिस्ट्र्रेशन नहीं
कराया है। यह राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे हैं। खनन अधिकारी ने शहर में 39
स्टाकिस्टों को चिन्हित किया था। डीएम के आदेश पर इन्हें रजिस्ट्र्रेशन
कराने के लिए नोटिस भेजा गया। इन्होंने नोटिस तक नहीं लिए। बाद में इन्हें
रिमाइंडर भेजे गए। इसके बाद चार स्टाकिस्ट रजिस्ट्रेशन का फार्म लेने आए
लेकिन यह भी नहीं लौटे।
स्टाकिस्ट सड़क से 50 मीटर की दूरी पर मौरंग,
गिट्टी का स्टाक कर बेंच सकते हैं। इनका रजिस्ट्रेेशन 10 साल के लिए किया
जाता है। इसका शुल्क 5000 रुपया है। रजिस्ट्रेशन न कराने पर इनके स्टाक को
जब्त करने की कार्रवाई होनी चाहिए। यह कार्रवाई करने से हाकि म बच रहे हैं।
90 फीसदी स्टाकिस्ट सड़क के बिल्कुल किनारे स्टाक किए हैं। यह अतिक्रमण के
दायरे में हैं। इन पर पालिका, पुलिस और यातायात महकमा भी कोई कार्रवाई
नहीं करता है। सड़क के किनारे स्टाक से आएदिन हादसे होते हैं।
ये है जुर्माना का प्रावधान
सड़क
के दोनों ओर अतिक्रमण पर जुर्माना का प्रावधान है। इसमें लोक संपत्ति अति
निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3 में 5 साल का कारावास एवं जुर्माना, आईपीसी
की धारा 447 में 3 माह का कारावास व 500 रुपये जुर्माना, पुलिस अधिनियम की
धारा 32 में 200 रुपये या ज्यादा जुर्माना, नगर पालिका अधिनियम की धारा
210 में 1000 रुपये से ज्यादा का जुर्माना, नगर पालिका अधिनियम की धारा 265
के तहत 500 या अधिक जुर्माना का कानून है।
वर्जन
नोटिस के
पहले रिमाइंडर के बाद चार दुकानदार फार्म ले गए थे। यह फार्म जमा करने नहीं
आए। इस संबंध में अधिकारियों से बात की जाएगी। इसके बाद जब्तीकरण अभियान
चलाया जाएगा। -वाईएन राम, खनिज अधिकारी